कथा सरोवर
- एम एन विजय कुमार
जयंत-दीपक दो भाई थे,दोनो एक ही पाठशाला मे पढा करते थे और यहां तक कि एक ही कक्षा मे। किंतु जयंत पढने मे होशियार था। लेकिन उसका भाई दीपक पढने से बचता था,और ना पढने के ढेरो बहाने ढूंढता था। जयंत के दोस्त पढनेवाले थे और दीपक के दोस्त ना पढनेवाले और कामचोरी करनेवाले थे।
जयंत अपने भाई दीपक को उन दोस्तों से बचने केलिए कहा करता,लेकिन दीपक उसे डांट लगा देता और कहता अपने काम से काम रखा करो।दीपक के दोस्त घर स्कूल जानेकेलिए निकलते और रास्ते मे कही और चले जाते।
कभी पाकॅ मे बैठते,कभी जाकर कही खाना-पीना करते और कभी फिल्म देखा करते थे।
दीपक उनकी संगति मे आ गया और वह भी धीर-धीरे स्कूल जाने से बचता रहता। दीपक भी उन दोस्तो के साथ बाहर मे खान-पीना और घूमना करता। जयंत उसके इस प्रकार की धोखाधडी से बहुत चिंतित था।दीपक से परीक्षा मे फेल होने की बात भी कही लेकिन दीपक ने नही माना।एक दिन की बात है दीपक स्कूल जा रहा था।उसके दोस्त मिल गए और उन्होने कहा आज स्कूल जाना है।हम सभी अपने दोस्त चरण का जन्मदिवस मनाएंगे और बाहर खान-पीना करेंगे और खूब मजे करेंगे। पहले तो दीपक ने मना किया किंतु दोस्तो के बार-बार बोलने पर वह उनके साथ चला गया।दीपक और उसके मित्रो ने खूब पाटीॅ करी और उस दिन स्कूल नही गए। इस प्रकार का काम वह और उसके दोस्त निरंतर करते रहते।
परीक्षा हुई जिसमे दीपक और उसके दोस्त सफल नही हो पाए वे फेल हो गए। जयंत ने इस बार भी और बार की तरह प्रथम स्थान प्राप्त किया।दीपक अपने घर प्रमाणपत्र लेकर गया जिस पर उसके मा-बाप ने देखा और बहुत उदास हुए। उन्हे उदासी हुई की एक मेरा बेटा इतना अच्छा पढने मे है और दूसरा इतना नालायक। दीपक कसी भी विषय मे पास नही हो पाया । दीपक के मा-बाप को बहुत दुखी हई
उन्होंन कसी से कुछ नही कहा मगर अंदर ही अंदर वह बहुत दुखी होते रहे।उन्होंने सोचा कि अब मै दूसरे लोगोंको क्या बताऊंगा कि मेरा बेटा एक भी विषय मे पास नही हो पाया।इस प्रकार मा-बाप को दीपक ने बहुत चिंतित वह दुखी देखा जिस पर उसे भी दुख हुआ। दीपक ने अपने मा-बाप को भरोसा दिलाया कि मै अगली परीक्षा मे सफल होकर दिखाएगा।दीपक ने अपने उन दोस्तों को छोड़दिया उन्होंने उसकी सफलता मे उसका मागॅ रोका था।उन सभी छल और कपट करनेवाले दोस्तोको छोड़कर पढ़ाई मे ध्यान लगाया नतीजा यह हुआ कि साल भर की मेहनत से वह परीक्षा मे सफल नही अपितु पाठशाला मे सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया।इस पर उसके मा-बाप को बहुत खुशी हुई है और अपने पुत्र दीपक को गले से लगाया उन्हे शाबाशी दी।दीपक को पता चला गया था कि जैसी संगति मिलेगी वैसा ही परिणाम मिलेगा।
संदेश - जैसे संगति मे रहते उससे वैसा ही गुण आता है अर्थात अच्छी संगति का संगत करना चाहिए
पाठशाला सहायक हिंदी
जिला परिषद हाईस्कूल, रंगापूर वनपतीॅ जिला
Cell 9441089035
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