कथा सरोवर
- जी.अंजली देवी
दीपक कुमार बहुत ही प्यारा बालक था।वह कक्षा तीसरी मे पढता।दीपक कुमार पाठशाला मे स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय त्योहार मनाये जानेवाला था।दीपक कुमार बहुत उत्साहित था इस कार्यक्रम मे भाग लेनेकेलिए।दीपक कुमार को उसकी कक्षा अधयापिका अंजली ने स्वतंत्रता दिवस की परेड मे भाग लेनेकेलिए बोला था।उसके खुशी का कोई ठिकाना नही था, वह खुशी-खुशी इस कार्यक्रम मे शामिल होनेकेलिए तैयारिया करने लगा।
स्वतंत्रता दिवस की होनेवाली परेड मे सभी साथियो के साथ पूर्व अभ्यास निरंतर करता रहा और अत्यंत उत्साह से भरा हुआ था।
परेड वाले दिन जब वह स्कूल के लिए तैयार होने होनेलगा तो दीपक कुमार ने अपने दादाजी को खोजा। दादाजी दीपक कुमार के साथ निरंतर पाठशाला जाया करते थे उसे पहुंचाने। किंतु दादाजी नही मिले माँ से पूछा तो माँ ने बताया दादाजी गाँव गए है।वहाँ दादी की तबियत खराब है,और अस्पताल मे है।पिताजी भी गए हुए है, अब मै तुम्हे स्कूल पहुंचा कर गाँव निकलूंगी।
दीपक कुमार ने यह बात सुनी तो बहुत दुखी हुआ और वह स्वयं भी दादी के पास जानेकेलिए जिद करने लगा।इस पर उसकी माँ दीपक कुमार को अपने साथ लेकर गाँव चली गई।जब वह कुछ दिन बाद पाठशाला पहुंचा वहा प्रधानाचार्य ने उन सभी बाल्को को बुलाया जिन्होने परेड मे भाग नही लिया था।इस पर दीपक कुमार का नाम नही पुकारा गया, अन्य सभी छात्रो को उनके अभिभावक को लाने केलिए कहा गया।दीपक कुमार ने सोचा कि मेरा नाम प्रधानाचार्य ने नही बोला लगता है वह भूल गए होंगे।दीपक कुमार प्रधानाचार्य के कार्यालय मे गया और उसने प्रधानाचार्य से कहा कि मै भी उस दिन परेड मे नही आया था।
लेकिन आपने मेरा नाम नही लिया क्या मुझे भी अपने मा-बाप को बुलाकर लाना है? दीपक कुमार के इस सरल स्वभाव को देखकर प्रधानाचार्य खुशी हुए और उन्होंने दीपक कुमार से बताया कि तुम्हारे मा-बाप ने फोन करके तुम्हारे स्कूल ना आने का कारण मुझे पहले ही बता दिया था।
तुम्हारी इमानदारी से मुझे खुशी हुई।
तुम अच्छे से पढ़ाई करो अगली बार परेड मे निश्चित रूप से भाग लेना
संदेश
सदैव सत्य बोलना चाहिए और सत्य का साथ देना चाहिए
व्यक्ती का स्वभाव ही उस व्यक्ती का परिचय है
एम. ए. बीएड
पाठशाला अध्यापिका
महबूबनगर ग्रामर स्कूल
Cell: 9703186814
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