Monday, March 7

सच्चाई - तस्लीम फातिमा (कथा सरोवर)

 कथा सरोवर


सच्चाई 
            तस्लीम फातिमा 


    विवेक अपनी कक्षा  का होनहार विद्यार्थि था I उसे प्रत्येक विषय में अच्छे अंक प्राप्त होते थे I फिर भी वह कभी प्रसन्न नहीं होता था I हमेशा उदासी और घुटन से घिरा रहता I क्योंकि-उसकी अप्रसन्नता का कारण उसकी ही कक्षा का छात्र सुनील था I सुनील कक्षा में हमेशा प्राथम स्थान पर होता था I विवेक और सुनील के अंकों में 4 या 5 अंकों का ही फर्क़  होता था I हमेशा विवेक, सुनील से पीछे रह जाता था I इसीलिए विवेक, सुनील से इर्ष्या करने लगा था I विवेक लाख प्रयत्न करके भी सफलता नहीं प्राप्त कर पाया I अब विवेक, सुनील से मन ही मन जलने लगा था I स्वयं को अपमानित महसूस कर रहा था I रात दिन वह इन्हीं विचारों से घुटता रहता I 

       इस बार की परीक्षाओं में  वह अधिक  अंक  प्राप्त कर सुनील पर विजय पाने का निश्चय करता है I अब उसने कुछ ऐसा कार्य कर डाला जिसकी कल्पना भी किसीने नहीं की थी I ऐसा काम नहीं करना चाहिए था I विवेक ने अध्यापक की आंक बचाकर मौका पाते ही, उन प्रश्नों के उत्तर पाठ्य पुस्तक में देखकर लिखे, जिनके जवाब वह नहीं जानता था I 

     परीक्षा का परिणाम  आया विवेक को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था I सभी अध्यापक और सहपाठी उसकी प्रशंसा  कर रहे थे I किन्तु वह अब भी खुश नहीं था I अपराध बोध से उसका  मन व्यथित था I उसके अंदर से यह अवाज आरही थी, कि- तू चोर है तू ने चोरी की है, जो सम्मान तुझे मिल रहा  है तू उसका अधिकारी नहीं है I वह बहुत बेचैन हो गया l 

     अंत में उसने इस ग्लानि से छुटकारा पाना चाहता है और कक्षाध्यापक को जाकर सच सच  बता देता है कि -कौन कौन से उत्तर उसने पाठ्य पुस्तक से  देखकर लिखे है I इस के  लिए  विवेक  ने अध्यापक  से  माफ़ी भी मांगी I तब अध्यापक ने विवेक  की प्रशंसा की I 

     सच्चाई बताते ही उसका मन शांत हो गया l उसे असीमित सुख की  अनुभूति हुई I अब विवेक के मन की इर्ष्या समाप्त हो गई थी I वह मन लगाकर पढ़ता  और जो अंक परीक्षा में मिलते  उनसे ही आनंद  का  अनुभव करता I 


नीति- "धोखे  से प्राप्त किया गया वैभव सुख नहीं देता "



तस्लीम फातिमा 

हिन्दी पंडित 

ZPHS खिलाशापुर

रघुनाथपल्ली 

जनगाँव  506244

99663 42656


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कथा सरोवर
Editor
Prasadarao Jami

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