Saturday, March 12

भारत की पहली महिला सत्याग्रही सुभद्राकुमारी चौहान - सुनीता प्रयाकरराव (साहित्य संगम)

साहित्य संगम


भारत की पहली महिला सत्याग्रही सुभद्राकुमारी चौहान
            सुनीता प्रयाकरराव


सुभद्रा कुमारी चौहान का  प्रारंभिक जीवन

    सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म 16 अगस्त, 1904 में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले के निहालपुर गाँव में एक संपन्न परिवार में हुआ था । वह जमींदार परिवार से ताल्लुक रखती थी। उनके पिता का नाम रामनाथ सिंह  चौहान था।   बाल्यकाल से ही वे कविताएँ रचने लगी थीं। उनकी रचनाएँ राष्ट्रीयता की भावना से परिपूर्ण हैं। सुभद्रा कुमारी चौहान, चार बहने और दो भाई थे। उनके पिता ठाकुर रामनाथ सिंह शिक्षा के प्रेमी थे और उन्हीं की देख-रेख में उनकी प्रारम्भिक शिक्षा भी हुयी l 

    सुभद्रा कुमारी का विद्यार्थी जीवन प्रयाग में गुजरा। उनको बचपन से ही हिंदी साहित्य की कविताये ,रचनाये पढ़ने में बहुत मज़ा आता था। सुभद्रा की सबसे अच्छी दोस्त महादेवी वर्मा थी जो सुभद्रा की तरह की कविताये लिखती थी और प्रसिद्द कवयित्री थीं।


सुभद्रा कुमारी चौहान की शिक्षा

    उन्होंने शुरू में इलाहाबाद के क्रॉस्थवेट गर्ल्स स्कूल में पढ़ाई की और 1919 में मिडिल-स्कूल की परीक्षा पास की। उसी वर्ष खंडवा के ठाकुर लक्ष्मण सिंह चौहान से शादी के बाद, वह जबलपुर चली गयी l


विवाह

    सुभद्रा कुमारी की शादी बहुत ही कम उम्र में हो गयी थी। साल 1919 में जब सुभद्रा मात्र सोलह साल की थी तब उनकी शादी मध्यप्रदेश राज्य में खंडवा जिले के रहने वाले  ठाकुर लक्ष्मण सिंह चौहान से कर दी गयी। शादी के बाद सुभद्रा कुमारी मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में आ गयी।

    शादी के बाद सुभद्रा कुमारी के पांच बच्चे हुए जिनका नाम सुधा चौहान, अजय चौहान, विजय चौहान, अशोक चौहानत और ममता चौहान था। उनकी बेटी सुधा चौहान की शादी प्रेमचंद के बेटे अमृतराय से हुई थी , सुधा चौहान ने अपनी माँ की जीवनी लिखी थी जिसका नाम था ‘मिले तेज से तेज’।


साहित्य

    सुभद्रा कुमारी चौहान बहुत ही उत्तम दर्जे की महान कवयित्री थी और इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की जब उनकी उम्र केवल नौ साल थी तब उन्होंने एक कविता ”नीम” लिखी थी और उनकी इस कविता को पत्रिका ”मर्यादा”ने प्रकाशित किया था।


कहानी संग्रह 

    बिखरे मोती' उनका पहला कहानी संग्रह है। इसमें भग्नावशेष, होली, पापीपेट, मंछलीरानी, परिवर्तन, दृष्टिकोण, कदम्ब के फूल, किस्मत, मछुये की बेटी, एकादशी, आहुति, थाती, अमराई, अनुरोध, व ग्रामीणा कुल १५ कहानियांँ  हैं! इन कहानियों की भाषा सरल बोलचाल की भाषा है! अधिकांश कहानियां नारी विमर्श पर केंद्रित हैं! उन्मादिनी शीर्षक से उनका दूसरा कथा संग्रह १९३४ में छपा। इस में उन्मादिनी, असमंजस, अभियुक्त, सोने की कंठी, नारी हृदय, पवित्र ईर्ष्या, अंगूठी की खोज, चढ़ा दिमाग, व वेश्या की लड़की कुल ९ कहानियां हैं। इन सब कहानियों का मुख्य स्वर पारिवारिक सामाजिक परिदृश्य ही है। 'सीधे साधे चित्र' सुभद्रा कुमारी चौहान का तीसरा व अंतिम कथा संग्रह है। इसमें कुल १४ कहानियांँ  हैं। रूपा, कैलाशी नानी, बिआल्हा, कल्याणी, दो साथी, प्रोफेसर मित्रा, दुराचारी व मंगला - ८ कहानियों की कथावस्तु नारी प्रधान पारिवारिक सामाजिक समस्यायें हैं। हींगवाला, राही, तांगे वाला, एवं गुलाबसिंह कहानियांँ राष्ट्रीय विषयों पर आधारित हैं। सुभद्रा कुमारी चौहान ने कुल ४६ कहानियां लिखी और अपनी व्यापक कथा दृष्टि से वे एक अति लोकप्रिय कथाकार के रूप में हिन्दी साहित्य जगत में सुप्रतिष्ठित हैं।

वातावरण चित्रण-प्रधान शैली की भाषा सरल तथा काव्यात्मक है, इस कारण इनकी रचना की सादगी हृदयग्राही है।


    सुभद्रा को बचपन से ही कविताये लिखने का शौक था लेकिन उस समय कविता लिखने के पैसे न मिलने के कारण उन्होंने कविताओं के साथ साथ कहानियाँ लिखना भी शुरू कर दिया था ताकि कहानियो के बहाने से पैसे कमा सके।

    उन्होंने अपने जीवनकाल में कई कविताये लिखी ,उनकी सबसे ज्यादा प्रसिद्द कविता ” झाँसी की रानी” है, सुभद्रा कुमारी ने रानी लक्ष्मी बाई की जिंदगी के बारे में बताते हुए बहुत ही बढ़िया ढंग से कविता लिखी।


झाँसी की रानी

”सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,

बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवानी थी,

गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,

दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।

चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी”।


*अब अगला उनकी प्रसिद्ध रचना ‘कदम्ब का पेड़’ :


यह कदंब का पेड़ अगर माँ , होता यमुना तीरे,

मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे–धीरे l


ले देतीं यदि मुझे बांसुरी तुम दो पैसे वाली,

किसी तरह नीची हो जाती यह कदंब की डाली l


तुम्हें नहीं कुछ कहता पर मैं चुपके–चुपके आता,

उस नीची डाली से अम्मा ऊँचे पर चढ़ जाता l


वहीं बैठ फिर बड़े मजे से मैं बांसुरी बजाता,

अम्मा–अम्मा कह वंशी के स्वर में तुम्हें बुलाता l


सुन मेरी वंशी को माँ तुम इतनी खुश हो जातीं,

मुझे देखने काम छोड़ तुम बाहर तक आतीं l


तुमको आता देख बांसुरी रख मैं चुप हो जाता,

पत्तों में छिपकर धीरे से फिर बांसुरी बजाता l


गुस्सा होकर मुझे डांटती, कहती नीचे आजा l

पर जब मैं ना उतरता, हंसकर कहतीं ‘मुन्ना राजा’l


नीचे उतरो मेरे भैया 

 मिठाई दूंँगी,

नए खिलौने, माखन-मिसरी, दूध-मलाई दूंँगी l


सम्मान

• सेकसरिया पारितोषिक      (१९३१) • •'मुकुल' (कविता-संग्रह) के लिए

• सेकसरिया पारितोषिक (१९३२) 'बिखरे मोती' (कहानी-संग्रह) के लिए (दूसरी बार)

• भारतीय डाकतार विभाग ने ६ अगस्त १९७६ को सुभद्रा कुमारी चौहान के सम्मान में २५ पैसे का एक डाक-टिकट जारी किया है।

• भारतीय तटरक्षक सेना ने २८ अप्रैल २००६ को सुभद्राकुमारी चौहान की राष्ट्रप्रेम की भावना को सम्मानित करने के लिए नए नियुक्त एक तटरक्षक जहाज़ को सुभद्रा कुमारी चौहान का नाम दिया है।


भारत की पहली महिला सत्याग्रही

    सुभद्रा कुमारी चौहान और उनके पति लक्ष्मण सिंह 1921 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन का हिस्सा बने। संघर्ष के दौरान दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। सुभद्रा कुमार को नागपुर जेल भेजा गया और वह भारत की पहली महिला सत्याग्रही बन गयी l

   सुभद्रा कुमारी चौहान ने जेल से भी स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेना जारी रखा। बाद में जब उनको रिहा किया गया तो वह सन 1942 में महात्मा गांधी के आंदोलनों में शामिल हुईं। 1923 से 1942 के बीच वह विधान सभा की सदस्य भी बनी। एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में, सुभद्रा कुमारी चौहान का संघर्ष भारत की आजादी का दिन 15 अगस्त 1947 तक जारी रहा। 

     

मृत्यु

    भारत का पहला स्वतंत्रता दिवस के एक साल बाद 15 फरवरी 1948 में मध्य प्रदेश में एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गयी l

    वह विधानसभा के एक सत्र में भाग लेने के बाद नागपुर से जबलपुर जा रही थीं। देश ने उनके नाम पर एक तट रक्षक जहाज का नामकरण कर उन्हें सम्मानित किया था और राज्य ने जबलपुर एक प्रतिमा लगाकर ऐसा किया था l



सुनीता प्रयाकरराव

हिंदी पंडित

करीमनगर l

9553599001

-------------------------------------------------------------------------------------

If you like this Writing and want to read more... Then Follow Us
or call
9849250784
for Printed Book
साहित्य संगम
Editor
Prasadarao Jami

-----------------------------------------------------------------------------------------------------


scan to see on youtube



scan to join on WhatsApp




BOOK PUBLISHED BY :

GEETA PRAKASHAN

INDIA

Cell 98492 50784

geetaprakashan7@gmail.com

---------------------------------------------------------------------------------

do you want to publish your writing through our BLOGPAGE ?

Please call us 62818 22363

No comments:

Post a Comment

हमर छत्तीसगढ़ - मुकेश कुमार भारद्वाज (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")

(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")      हमर छत्तीसगढ़  💐..................................💐 छत्त...