कथा सरोवर
गोपालपुर नामक शहर में एक सरकारी पाठशाला में आठ सौ छात्र पढ़ा करते थे। वहां के अध्यापक विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अच्छे कार्य जैसे खेल, सांस्कृतिक, नीति कार्य पर भी शिक्षा दिया करते थे।
एक दिन पाठशाला में स्वच्छ भारत कार्यक्रम में सभी छात्र और अध्यापक भाग ले रहे थे। अध्यापक ने पांच छात्रों को बुलाया और कहा : "यहाँ पर मिट्ठी निकालो और गड्ढा खोदो" कह कर वहां से चले गए। बच्चे कुछ देर तक मिट्ठी निकालकर फेकने लगे।
उतने में ही अध्यापक वहां से बुलाकर और एक स्थान बताकर वैसे ही गड्ढा खोदने को कहा। बच्चे फिर से मिट्ठी निकालने लगे। अध्यापक कुछ देर बाद फिर से बच्चों को बुलाया दूसरा स्थान बताकर गड्ढा खोदने को कहा। फिर गड्ढा पूरा हुए बिना ही तीसरा स्थान, चौथा स्थान बतलाकर गड्ढा खोदने को कहा। बच्चों को बहुत गुस्सा आया और थक गये। समझ में नहीं आया कि अध्यापक ऐसा क्यों किया। वो अपने-अपने घर गये और माँ-बाप को बुलाकर ले आये। अध्यापक और माँ-बाप आपस में लड़ने लगे और ऐसा करने का कारण पूछा। गड्ढे खोदने का काम भी पूरा नहीं करने दिया। अध्यापक माँ-बाप को शाँत किया और बच्चों को बिठाकर समझाने लगे, तुम लोग भी प्रतिदिन कक्षा में इसी तरह करते हो। कोई भी विषय ध्यान से नहीं पढ़ते। कोई भी काम ढंग से नहीं करते। ऐसा करने से ज़िंदगी में सफल नहीं हो पाते। तुम लोगों में ये आदत छुड़ाने के लिए ही ऐसा काम दिया गया। बच्चों को समझ आया और सुधर गये।
अगले दिन से छात्र पढाई में ध्यान देकर पढ़ने लगे। हर काम ढंग से करने लगे। बच्चों में बदलाव देखकर अध्यापक और माँ-बाप बहुत खुश हुये।
-------------------------------------------------------------------------------------
No comments:
Post a Comment