कथा सरोवर
रोहित और राहुल अच्छे दोस्त हैं l रोहित बचपन से ही भगवान पर पूरा विश्वास रखता था और अच्छी तरह पूजा भी करता था l राहुल विश्वास करता है लेकिन पूजा नहीं करता है l
रोहित और राहुल बड़े होते हैं l दोनों व्यापार करके पैसा कमाने का निर्णय भी लेते हैं। दोनों 8 एकड़ की जमीन खरीद कर फसल उगाने का फैसला लेते हैं यह जमीन फसलों की कटाई का केंद्रक है । रोहित और राहुल तय करते हैं कि -कौन सी फसल बोई जाए और कैसे खेती की जाए ।
रोहित फसल के लिए बीज और खाद खरीद कर खेत की सिंचाई भी करता है ,इधर रोहित भगवान की पूजा करने की सामग्री इकट्ठा करके यज्ञ भी करता है । कुछ दिनों के बाद बारिश भी होती हैं । अच्छा फसल निकलता है कि- फसल बेचने से अधिक लाभ मिलता है। लेकिन रोहित की राय है कि उसके यज्ञ के कारण बारिश हुई, फसल अच्छी तरह उगे हैं।
इसलिए राहुल चाहता है कि -मुझे अच्छे लाभ का बड़ा हिस्सा मिले। इसके बारे में दोनों के बीच तर्क हो जाती हैं । दोनों की समस्या प्रधान के पास लेकर जाते हैं । दोनों अपना तर्क प्रधान के सामने सुनाया जाता है। प्रधान दोनों के बीच जो विवाद है सोच- समझकर दोनों को अलग -अलग थैली में चावल के दाने पत्थरों से मिलाकर देता है। कहता है पत्थरों को अलग करके दूसरे दिन लौट आने के लिए कहता है।
दूसरे दिन दोनों प्रधान के पास जाकर अपनी -अपनी थैलियाँ देते हैं। रोहित की थैली जैसा का वैसा है। क्योंकि उसने भगवान के समक्ष रखकर पूजा की। कोई कमाल नहीं हुआ। राहुल की थैली में केवल चावल के दाने हैं । प्रधान पूछने पर राहुल ने कहा रात भर चावलों में पत्थरों को अलग कर दिया । तब प्रधान कहता है। इस कारण फसल में जो लाभ है उसमें अधिक लाभ प्रतिशत राहुल को दिलवाया ।
तब अंत में रोहित अपनी गलती का एहसास हो कर राहुल से क्षमा मांगी ,तत्पश्चात रोहित मेहनत करना आरंभ करता है। दोनों अच्छे मित्र रहकर बड़ा व्यापार करता है और समान रूप से लाभ उठाते हैं । दोनों दूसरों की सहायता भी करते थे। अंत में सुखी जीवन बिताते हैं।
शिक्षा
मेहनत का फल कभी भी व्यर्थ नही होगा।
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