Tuesday, March 1

एक शेर और लोमड़ी - सुनीता प्रयाकरराव (कथा सरोवर)

कथा सरोवर


एक शेर और लोमड़ी

सुनीता प्रयाकरराव

    एक बार की बात है  एक  जंगल में बलवान शेर रहा करता था। शेर रोज शिकार करने के लिए नदी के किनारे जाया करता था। एक दिन जब नदी के किनारे से शेर लौट रहा था, तो उसे रास्ते में लोमड़ी  दिखाई दिया। शेर जैसे ही लोमड़ी के पास पहुंँचा, लोमड़ी  शेर के कदमों में लेट गया।

    शेर ने पूछा अरे भाई! तुम ये क्या कर रहे हो। लोमड़ी  बोला, “आप बहुत महान हैं, आप जंगल के राजा हैं, मुझे अपना सेवक बना लीजिए। मैं पूरी लगन और निष्ठा से आपकी सेवा करूँगा। इसके बदले में आपके शिकार में से जो कुछ भी बचेगा मैं वो खा लिया करूंँगा।”

    शेर ने लोमड़ी  की बात मान ली और उसे अपना सेवक बना लिया। अब शेर जब भी शिकार करने जाता, तब लोमड़ी  भी उसके साथ चलता था। इस तरह साथ समय बिताने से दोनों के बीच बहुत अच्छी दोस्ती हो गई। लोमड़ी , शेर के शिकार का बचा खुचा मांस खाकर बलवान होता जा रहा था।

    एक दिन लोमड़ी ने शेर से कहा, “अब तो मैं भी तुम्हारे बराबर ही बलवान हो गया हूंँ , इसलिए मैं आज हाथी पर वार करूंँगा। जब वो मर जाएगा, तो मैं हाथी का मांस खाऊंँगा। मेरे से जो मांस बच जाएगा, वो तुम खा लेना। शेर को लगा कि लोमड़ी दोस्ती में ऐसा मजाक कर रहा है,” लेकिन लोमड़ी  को अपनी शक्ति पर कुछ ज्यादा ही घमंड हो चला था। लोमड़ी पेड़ पर चढ़कर बैठ गया और हाथी का इंतजार करने लगा। शेर को हाथी की ताकत का अंदाजा था, इसलिए उसने लोमड़ी  को बहुत समझाया, लेकिन वो नहीं माना।

    तभी उस पेड़ के नीचे से एक हाथी गुजरने लगा। लोमड़ी  हाथी पर हमला करने के लिए उस पर कूद पड़ा, लेकिन लोमड़ी  सही जगह छलांग नहीं लगा पाया और हाथी के पैरों में जा गिरा। हाथी ने जैसे ही पैर बढ़ाया वैसे ही लोमड़ी उसके उसके पैर के नीचे कुचला गया। इस तरह लोमड़ी ने अपने दोस्त शेर की बात न मानकर बहुत बड़ी गलती की और अपने प्राण गंवा दिए।


कहानी से सीख :

हमें कभी भी किसी बात पर घमंड नहीं करना चाहिए और अपने सच्चे दोस्त को नीचा नहीं दिखाना चाहिए।



सुनीता प्रयाकरराव

हिंदी अध्यापिका, 
करीमनगर, 
9553599001
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कथा सरोवर
Editor
Prasadarao Jami

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