कथा सरोवर
- स्वप्ना बागेलीकर
कलम का नाम : स्वप्ना वाघेश्वरी
आकाश बहुत ही गरीब घर का लड़का है। उसे पढ़ने की इच्छा बहुत है लेकिन गरीबी के कारण वह पढ़ने से दूर रहता जा रहा है। मगर आकाश चाहता है कि वह खूब पढ़कर अच्छी नौकरी पाए और खूब पैसा कमाए नाम कमाएं ।
पास वाले गाँव में एक दानी व्यक्ति रहता है उसका नाम शांतराम है ।आकाश अपनी इच्छा और समस्या को लेकर शांताराम के घर पहुँचता है और सारी बात बताता है।समस्या और इच्छा सुनने के बाद शांताराम आकाश की सहायता करने के लिए तैयार हो जाते है।वे आकाश से कहते है कि "तुम्हारे गाँव में जों भी मुझे ब्याज के रूप में पैसा देने का है उसे वसूल करके कल सुबह 10 बजे यहाँ आना " मैं तुम्हारी मदद करूंगा। तुम्हारे साथ भतीजे राम को भेजता हूँ ऐसा कहकर शांताराम उन्हे भेज देता है।
गाँव लौटने के बाद आकाश कुछ लोगो से मिलकर शांताराम को देने वाले ब्याज वसूल किया और घर जाकर भोजन करके सो गया ।सुबह सात बाज रहे है फिर भी आकाश नींद से नहीं जागा ,तब राम ने आकाश को नींद से जगाने का प्रयत्न किया फिर भी नहीं जागा। तब राम ने आकाश से कहा कि अपनी पढ़ाई के लिए शांताराम से सहायता की बात याद दिलाई । आकाश आराम से कहने लगा कि जाएंगे जल्दी क्या है,वैसे तो उन्होंने मुझसे से वादा किया कि वे मेरी सहायता करेंगे । फिर ब्याज का पैसा लिए शांतराम के गाँव पहुंचे तब तक ग्यारह बाज चुके थे । उनको ब्याज का पैसा दे दिया और अपनी पढ़ाई के लिए जो सहायता शांताराम ने करने का वादा किया उसके लिए इंतज़ार कर रहा था ।
शांताराम ने आकाश की ओर देखते हुए कहा "मैं तुम्हारी सहायता करना चाहता था लेकिन तुम ने आने मे बहुत दर लगाई । तुम्हारे जैसे ही किसी दूसरे को भी पैसों की ज़रूरत थी वह समय पर पहले ही आया और पैसा ले गया ।
जो व्यक्ति समय का पालन नहीं करता, उनकी सहायता करना भी व्यर्थ है, ऐसा शांतराम ने कहकर आकाश से फिर कहा कि "देखो आकाश जीवन में कुछ बनना है तो समय का पालन करना सीखो"
ऐसा कहकर शांतराम अंदर चले जाते है। आकाश ने भी तय कर लिया कि आज से समय पर अपने काम पूरा करूंगा।
शिक्षा: समय का पालन न करने से आकाश सहायता से वंचित रह गया। कोई भी व्यक्ति जीवन में सफल होना है तो समय का पालन ज़रूर करें। समय बहुत मूल्यवान है।
बहुत बढिया मैडम जी
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