Sunday, March 20

छीनी रोटी से जान छिनी - सुरेश लाल श्रीवास्तव (कथा सरोवर)

 कथा सरोवर


छीनी रोटी से जान छिनी

सुरेश लाल श्रीवास्तव

    किसी नगर के एक मुहल्ले में एक महिला रोज़ सुबह रात की बची हुई रोटियों को छत के ऊपर से सड़क की तरफ़ जैसे ही फेंकती,वैसे ही नीचे बैठे सारे कुत्ते उस पर टूट पड़ते।उन कुत्तों में एक दबंग किस्म का मोटा-ताज़ा कुत्ता भी था, जो अन्य कुत्तों को रोटियां खाने नहीं देता था और सारी रोटी स्वयं खाकर बड़े ही रईसी से आराम से टहलते हुए आगे बढ़ जाता।बेचारे अन्य कुत्ते मन मसोस कर उसे देखते रह जाते।कोई भी उस दबंग कुत्ते से भिड़ने की हिम्मत नहीं कर पाता।दबंग कुत्ते को अपनी इस दबंगई पर बड़ा ही नाज़ था।

    छत से महिला द्वारा रोटियां फेंका जाना और कुत्तों को उस पर टूट पड़ना तथा दबंग कुत्ते द्वारा सबको दूर कर अकेले रोटियां खाने का क्रम बदस्तूर ज़ारी रहा।रोज़ की तरह एक दिन जब महिला छत से बासी रोटियों का पैकेट गिराई, पास के सारे कुत्ते रोटी पाने के लिए दौड़े।दबंग कुत्ता उस दिन थोड़ी दूर पर था।वह भी अपने स्थान से रोटियां पाने के लिए दौड़ा।डेली की तरह वह अन्य सभी कुत्तों को डरा घुड़किया कर पीछे कर दिया और सारी रोटी मुँह में ले बड़े आराम से सामने की सड़क के रास्ते से आगे बढ़ा।वह दबंग कुत्ता मुश्क़िल से अपनी मस्ती में 20-25 मीटर ही आगे बढ़ा था कि सामने से तेज रफ़्तार से आ रही ट्रक ने उसे रौंद दिया।उसके मुख की रोटियां इधर-उधर छितरा गईं।जिस रोटी को वह कुत्ता अपनी ताकत  की दबंगई से कमज़ोरों से छीनता रहा,आज उसी छीनी रोटी के चलते उसकी जान चली गई।

    "इस लघु कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें आपस में प्रेम पूर्वक रहना चाहिए।किसी के हक़ या आगे की थाली को अपने शक्ति बल के घमण्ड में नहीं छीनना चाहिए।परपीड़न का परिणाम अन्ततः स्वयं के लिए घातक सिद्ध होता है।"


सूक्ति सुधा

    "स्वार्थ और लोभ, आपना तथा पराया का मोह जाल मानव व्यक्तित्त्व विकास को- संकीर्णताओं के दायरे में ला देता है। इससे ग्रसित व्यक्ति न तो स्वस्थ आत्म विकास को अभिलक्षित कर पाता है और न ही देश समाज का भला कर सकता है।"                

सुरेश लाल श्रीवास्तव

प्रधानाचार्य

राजकीय हाई स्कूल

जहाँगीरगंज, अम्बेडकरनगर

उत्तर प्रदेश

9415789969

98388 66840


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कथा सरोवर
Editor
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