कथा सरोवर
पुराने जामाने कि बात है। एक गाँव था।वह चारो ओर से जंगलों से घिरा था। वहाँ से शहर बहुत दूर था।उस गाँव मे एक गरीब परिवार रहता था।उस परिवार मे एक अब्दुल नाम का लड़का रहता था। उस के पिता का बचपन मे ही देहांत हो गया था। माँ और अब्दुल दोनो ही रहते थे।उसकी माॅ लोगों के घरों में काम करके अपना जीवन यापन करती थी।वह बड़ी धर्म-परायण ' नैतिक मूल्य का पालन करने वाली थी।अब्दुल का भी वे उसी तरह पालन पोषण किया था।एक दिन सभी गाँव वाले सामान के लिए पास वाले शहर के बाजार जाना चाहते थे।उस समय जंगल मे डाकू रहते थे। वे जंगल के रास्त में आने - जाने वाले लोगों को लूटकर उनका पैसा और सामान लूट लेते थे।उस कारण सभी गाँव वाले अकेले ना जाकर सभी एक साथ मिलकर जाते थे।ताकि डाकू उनको लूटना ले। अगर डाकू लूटना आने पर उनका सामना सभी मिलकर कर सके ।
एक दिन सभी गाँव वाले सामान के लिए शहर जा रहे थे।अब्दुल की मां भी अपनी जरूरत के सामान लाने के लिए अपने बेटे अब्दुल को भी शहर भेजती है। गाँव वाले सभी लोग एक साथ मिलकर अपना सफर शुरु करते हैं।रास्ते में जाते- जाते घने जंगल और बड़े बड़े पहाड आते हैं। लोग डरे - डरे उस जंगल से जा रहे थे। उतने में अचानक एक डाकुओं की बड़ी टोली उन पर हमला करेगी है। सभी गाँव वालों को अपनी तलवारों और बंदूकों से मारकर सभी की तलाशी लेकर उन सभी का पैसा और सामान लूट लेते हैं।उसी दौरान एक डाकुओं का सरदार अब्दुल के पास आकर उसकी सारी तलाशी लेता है पर लड़के अब्दुल के पास कुछ भी पैसा या सामान न मिलने पर उसे छोड़कर जाने लगते हैं।तभी अब्दुल ने उन डाकुओं को बुलाकर कहा-ऐ डाकुओं के सरदार मेरे पास आओ पैसे लेकर जाओ।डाकुओं के सरदार ने कहा कि मैने अभी- अभी तुम्हारी तलाशी ली थी तब मुझे कुछ न मिला था।अब्दुल ने कहा कि - मेरी माँ ने मेरे कुर्ते की बगल में एक जेब सीकर पैसे उस जेब में रखी है।आओ पैसे लेलो।डाकूने कहा कि "-अगर तुम चुप रहजाते तो तुम्हारा पैसा बच जाता था ।तुम मुझे बुलाकर पैसा क्यों दे रहे हो? तब लड़के अब्दुल ने कहा कि - मेरी माँ कहती थी कि - जीवन में कभी झूठ नहीं बोलना।चाहे जान चले जाए या प्राण। झूट बोलना बहुत बड़ा पाप है।इसी कारण मैने आपको सच बता दियाहै।
अब्दुल की बातें सुनकर सभी डाकू दंग रह जाते हैं।और डाकुओं के सरदार को उसी क्षण अपनी गलती और छोटे बच्चे की ईमानदारी सचाई उस की नैतिकता से प्रभावित होकर वह अपने द्वारा लूटा पैसा - सामान सभी गाँव वालों को वापस दे देते है।और उस दिन से सभी डाकूगिरी ,लूटना छोड देते हैं।मेहनत कर के जीवन यापन ने का निर्णय लेते हैं।चोरी छोड देते हैं।
नीती-
इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि झूठ नहीं बोलना और माता - पिता अपने बच्चों को नैतिकमूलयों को सिखाना।
एम डी बाबार
M.A B.Ed
हिंदी पंडित
zphs Nagsanpally,
mandal -papannapet
District medak
cell no-9849809135
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