कथा सरोवर
दसवीं कक्षा में पढ़ने वाला लड़का कृष्णा एक साधारण परिवार में जन्मा था। वह इकलौता होने के कारण उसे शुरू से ही बहुत लाड प्यार मिलता आया। वह सब का दुलारा था। कृष्णा के माता और पिता अपने अपने व्यवसायों में व्यस्त थे। इसी कारण वह दादी का लाडला बनकर चॉकलेट खरीदने , समोसा खाने के लिए पैसा मांग कर खर्च करने की आदत डाल ली। धीरे-धीरे यही आदत माता-पिता को बिना बताए ही बाहर जाकर दोस्तों से मजा करने में बदल गई यही छोटी सी आदत बड़ी बनकर बुरी आदत में बदल गई और वह पढ़ाई से भी दूर होता गया। एक बार कृष्णा के दोस्तों ने सब मिलकर बाहर जाने की योजना बनाई और कहते हैं कि दादी से पूछ कर ₹1000 ले आओ। कृष्णा दादी से पैसे पूछने पर वह मना करती है और इस विषय में मां की अनुमति लेने को कहती है। कृष्णा रूठ जाता है और वह दादी से बिना पूछे ही उनकी पैसों की पोटली निकाल कर पैसे ले जाता है। घरवालों को स्कूल जाने का बहाना बनाकर अपने दोस्तों से बाहर चला जाता है।
कृष्णा के पैसों से सब दोस्त खूब मस्ती करते हैं, बहुत चीजें खरीद कर खाते हैं और खेलने में लग जाते हैं खेल खेलों में लड़ाई शुरू हुई ।उसने अपने दोस्त रमेश को धक्का दिया इससे वह सामने वाली पत्थर पर गिर गया। इस दुर्घटना में रमेश के सिर पर बहुत बड़ा चोट लग जाता है सब बच्चे घबरा कर कृष्णा पर आरोप लगाते हैं कि उन सभी को बाहर ले आने की योजना कृष्णा की ही थी। दोस्तों पर भरोसा रखने वाला कृष्णा यह बात सुनकर दंग रह जाता है।
दुर्घटना के बारे में स्कूल से फोन माता और पिता को जाते ही वे बहुत क्रोधित हो जाते हैं और अध्यापकों से रमेश के माता पिता ने माफी मांगते हैं कि उनका बेटा लाड प्यार के वजह से बिगड़ गया इस घटना के बाद कृष्णा पढ़ाई में बिल्कुल ध्यान नहीं लगा सकता है ।परीक्षाओं के समय भी ठीक से नहीं लिख पाता है और फेल हो जाता है।
एक और माता-पिता के रूठ जाना और मित्रों से भी दूर होने से मन ही मन कृष्णा दुखी हो जाता है। अपने किए पर पश्चाताप से माता-पिता के पास जाकर कहता है कि मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई आपको बिना बताए पैसे लेना, बाहर जाना गलत बात है ।मेरे इसी व्यवहार से आपको सभी के सामने शर्मिंदा होना पड़ा मुझे माफ कीजिए अगली बार इस प्रकार का व्यवहार नहीं करूंगा। और पढ़ाई में ध्यान लगाऊंगा दादी से भी माफी मांग कर कहता है कि इस तरह का बुरा व्यवहार कभी नहीं करूंगा।
कृष्णा में परिवर्तन आने से सभी खुश हो जाते हैं। और उसे गले लगा लेते हैं कृष्णा भी दिया हुआ वचन निभा कर पढ़ाई की ओर अग्रसर हो जाता है।
शिक्षा - जरूरत से अधिक पैसे देने से बच्चे बिगड़ जाते हैं।बच्चों को प्यार करने के साथ-साथ उनके आदतों पर निगाह बनाए रखना चाहिए इसी प्रकार बच्चे भी बड़ों के प्यार का फायदा नहीं उठाना चाहिए।
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