Wednesday, March 16

एक नई सुबह - डॉ. शाहीद मोहम्मद (कथा सरोवर)

कथा सरोवर


एक नई सुबह

डॉ. शाहीद मोहम्मद

    कुछ ही दिन पहले की बात है जब अनन्या का पती किसी लेडीज़ डॉक्टर को घर पर बुलाकर अनन्या के गर्भ में पल रहे शिशु की जाँच करवाई थी उस समय डॉक्टरने कहा था “अरे... यह तो लड़की है....! बस यह शब्द सुनते ही परिवार के सदस्यों को सदमा लगा गया l सास ने कहा ‘ डॉक्टर साहिबा क्या किसी तरह कुछ नहीं हो सकता जिस से साँप भी मरे और लाटी भी न टूटे ? हम तो कब से एक पोते की प्रतीक्षा कर रहे थे अब नसीब में पोता नहीं है तो इस बच्ची का क्या करेंगे ? डॉक्टर साहिबा के हाथ खुजलाने लगे ..कहा की अब बस पंद्रह दिन का वख्त बचा है ..सोंच कर जल्दी इन्फॉर्म कर देना कहकर चली गई..l

    अनन्या का पती नारायण चौदरी का चेहरा ऐसे लाल होकर मचल रहा था ..जैसे वह डॉक्टर होता  तो  कैंची और ब्लेड लेकर चीड फाड़ डालता और पिंड को निकल कर गठर में फ़ेंक देता, न जाने कितने बेटियों को फेंका जाता है l इन दिनों अनन्या हर घंटे एबॉर्शन शब्द सुन - सुन कर परेशान होकर तंग हो गई ...हर रात वह पती से दूर पलंग के नीचे फर्श पर सोजाती है.. हर रात की तरह आज रात भी वह बेटी की चिंता में कई तरह के ख्याल आते है जैसे क्या मै घर छोड़ कर भाग जाऊ .... जाऊ तो कहा जाऊ .. माँ बाप के पास तो नहीं जा सकती ..उन पर बोझ बनना नहीं चाहती... मेहनत कर लेती पर पेट में पलती बच्ची का क्या होगा... इसी चिंत को लेकर आंसू बहाती आँख मूंदती है ....l

    गहरी नींद में उसे महाभारत  में श्री कृष्णा के विराट रूप अर्जुन के सामने प्रकट होता है... उसी तरह अनन्या से सवाल पूछा जाता है .. बताऊ तुमने अपनी ही बेटी की हत्या क्यो करवाई ? सवाल सुनते ही अनन्या पूरी तरह सिहर जाती है , वह लड़खड़ाते हुए जवाब देने की कोशिश करती है ... सिर्फ मै अकेली नहीं हू ... इसके साथ मेरे पती , सास, ससुर और समाज भी इसका दोषी है ... सिर्फ आप मुझसे ही सवाल क्यों पूछ रहे है ?  इन सभी से तो पूछिए ... विराट रूप की आज्ञा से सभी वहा सभी प्रकट होते है .... तत्पश्चात एक बड़ा सा पिंड जैसा एक गुब्बारा  सामने प्रकट होता है और उसे चीरती हुई नन्ही से तारा निकल आती है...जो अनन्या का ही प्रतिरूप जैसे उसकी ही बेटी जन्मी हो ...प्रकट होते ही वह विराट रूप से कहती है की अगर आपकी आज्ञा हो तो मै इनसे  कुछ  प्रश्न पूछना चाहती हूँ ..  विराट रूप से अवसर प्रधान किया जाता है ...तुरंत ही वह अपने पिता के सामने प्रकट होती हा और पूछती है ... देहज देना पडेगा.. आपकी मर्दानगी मुझसे लांछित होगी ..शायद इसी लिये मुझे खोंक में ही मरना चाहते थे ..सोंचती हूँ मरे नाना भी यही करते तो आपको पत्नी कहा मिलती ..इस पप्रश्न को सुनकर चोधरी हक्का बक्का हो जाता है, शर्मिंदगी से सर झुखा लेता है ...फिर वह रूप दादा दादी के पास  पहुँचती है और पूछती है “ आप दोनों मेरे जन्म को लेकर  बहुत परेशान थे, क्यौकी मरे आने से आपके वंश आगे नहीं चल पायेगा ..क्या आपको नहीं पता की आपके वंश को एक स्त्री  के सहारे ही आगे बड़ा सकते है ? जब लड़की ने अपनी नज़रे डॉक्टर की ओर घुमाई तो डॉक्टर को ऐसे लगा जैसे आग का शोला लग गया हो ...” पृथ्वी पर तो भगवान का स्थान आप को ही मिलता है,फिर कैसे पैसो की लालच में आकर मुझे मार दिया जब भगवान ही ऐसे शर्मनाक काम कर रहे हो तो मुझे आपको बनाने वाले भगवान पर भी शर्म आ रही है...आपसे तो आच्चे वे हत्यारे ,आतंकवादी है जो ज़मी पर पैदा हुए इंसानों को मारते है, आप तो गर्भ में ही.....? डॉक्टर मालविका उस बच्ची के सवाल सुनते ही अपने औरत होने पर और अपने पेशे पर शर्म खाती है l उसने न जाने पैसे के लालाच में कितनी भ्रूण हत्याये की थी l परी ने जब माँ... कहा अनन्य चौंक उठी ..उसके सामने लड़की परी  की तरह कड़ी उई थी .. वह परी  अब अनन्या को भीगी पलको से निहार रही थी l अनन्या भी अपनी परी को जी भरकर देख रही थी... अनन्या धीरे - धीरे माँ... माँ...कहते हुए ओझल हो जाती है ... अनन्या की आँखे खुल जाती है उसका पूरा शरीर कांप रहा था, पसीने से पूरी तरह लथपथ हो गई थी, उठकर चारो ओर उसने हड्बहडाहट  से देखा लेकिन यह सपना उसे एक नए जोश से भर दिया l अनन्या के लिए अब एक नया सबेरे था वह अपने पेट पर हाथ रख कर बच्ची पुचकारते हुए बस इतना ही बोल पाई ... न बेटी ना..., अब कुछ कहने की जरूरत नही है l तू अब अपनी माँ  के खोक में सुरक्षित है l तुम्हारी माँ तुम्हरे साथ है ..तुम्हे मै जन्म दूंगी मेरी बच्ची ....मै....l’’

    अनन्या  अब बालकनी  में आ गई सामने पीपल के कोटरे  में गौरैया दो दिन पहले अपने अन्डो से निकल नन्हें – नन्हें बच्चो को चुंगा रही थी l अनन्या के लिए यह नया सबेरा था...l

डॉ.  मोहम्मद शाहीद

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