Monday, February 28

रुद्रदेव - प्रसाद राव जामि (कथा सरोवर)

कथा सरोवर


रुद्रदेव

- प्रसाद राव जामि

    एक था राजा गणपति देव । एक थी रानी सोमांबा। सदा भक्ति मे भगवत स्मरण करते थे।निरंतर शिव और काली माता की पूजा करते थें। हर पल ,हर क्षण श्रद्धा के साथ स्मरण करते थें । दोनों गुणवान,चतुर ;होशियार थें। सभी राजाओं से मिलजुल कर रहते थें।सभी राजाओं में उनका मान सम्मान रहता था।खेती- बाड़ी और वाणिज्य दोनों को अपने दो आंख मानते थें। काकतीय(काली) माता की कृपा से गणपति देव और सोमांबा ने प्यारी सी बिटिया को जन्म दिया। पर शत्रुओं के डर से गणपति देव ने अपने परिवार में भी यह बात छिपाई अपने घर परिवार के सदस्यों को और सारे राज्यों को गणपति देव ने बताया कि हमारी जो संतान हुई है; वह पुत्र है ।

    गणपति देव शिव के परम भक्त थे ।इसलिए अपने पुत्र का नाम वह रुद्रदेव रखा ।रुद्रदेव को पुरुषों के साथ शिक्षा- दीक्षा के लिए अपने गुरुदेव विश्वेश्वर शिव शंभू के पास आश्रम भेजा। रुद्रदेव अपने गुरु की प्रशिक्षण में ही अत्यंत श्रद्धा और अत्यंत भक्ति से  शिक्षा दीक्षा प्राप्त की। और सहपाठियों के साथ युद्ध कला प्रशिक्षण मे उनके छक्के छुड़ाती थीं। 

    गणपति देव ने अपने बेटे के दिल में कूट-कूट कर धैर्य की शक्ति भर दी थीं।किसी भी आपत समय में रूद्र देव टस से मस न होती थीं। रुद्रदेव शिक्षा-दीक्षा समाप्त कर  अपने पिता के पास काकतीय राज्य वापस पहुंची ।पिता गणपति देव ने कार्तीक पूर्णिमा के दिन अपने राज्य तिलक रूद्र देव को लगाकर काकतीय राज्य का राजा बना दिया।रूद्र देव भी अपने माता पिता के जैसे शिव और मां काली माता की परम भक्त थीं।अपने पिता के जैसे ही खेती बारी वाणिज्य को अधिक प्रधानता दी ।अनेक युद्धों को जीता। हर जीत पर उन्होंने अपने राज्य में खेती बारी के लिए एक तालाब खुदवाया ।अनेक शिव मंदिर बनवाएं। जो आज भी मशहूर है। 

    रुद्रदेव युद्ध में जाने से पहले शिव की उपासना करती और अपने राज्य की प्रमुख पेरणी नृत्य से प्रभावित होती ।एक स्त्री होते हुए भी आदि शक्ति का रूप धारण कर लेती ।काली माता की जैसी रणचंडी बनकर युद्ध में शत्रुओं पर टूट पड़ती और विजयी होकर शांति मूर्ति रूप धारण कर लेती। दूर दूर अपनी राज्य की स्थापना की थीं।अपने राज्य के परिवारों की सुख- शांति के लिए जुड़ जाती।


 शिक्षा: इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि  स्त्री आदिशक्ति का प्रतिरूप है। नारी सामान्य नहीं असामान्य है।नारी अबला नहीं सबला है। स्त्री का हर-पल आदर करें।



प्रसाद राव जामि

साहित्यकार

6301 260 589


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कथा सरोवर
Editor
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