Sunday, February 27

सुंदरवन-जंगल - सावित्री जामि "चेतना" (कथा सरोवर)

  कथा सरोवर


सुंदरवन-जंगल

- सावित्री जामि "चेतना"

    एक था जंगल सुंदर वन जंगल। जंगल में चारों ओर हरियाली ही हरियाली थी । ऊंचे-ऊंचे पर्वत;उन पर्वतों से झरती झरना। इतनी सुंदर इतनी मस्ती दोनों आंखों से सच!उस झरना का; उस जंगल का वर्णण करने के लिए शब्द भी कम पढ जाते। दृश्य बहुत ही सुंदर मनोरंजक थीं।  

    जंगल मे भालू, हाथी, हिरण, भेढिया, लोमड़ी, खरगोश, बंदर, गाय, कुत्ता, सूअर, भेड, बकरी,गधा,घोडा, खरगोश, चूहा, बिल्ली,गिलहरी, भैंस, लामा, ऊंट,मोर, कौवा ,कोयल, चिड़िया,कबूतर ,चील,वर्जी पक्षी, चातक,टर्की, हंस,बटेर, बतख,सार, कुलचारी,कबुतर, बुलबुल,कीडे- मकोड़े,और सुंदर -सुंदर  तितलियां ,भौंरा मिलजुल कर रहते थें।कोई किसी का भी कभी नुकसान नहीं पहुंचाते थे। सभी आपस में मिलजुल कर रहते थें।चारों ओर जहां भी देखें जंगल में खुशियां हीं खुशियाँ नजर आती थीं। पक्षियों की चहचहाहट से;झरने की आवाज से;कोयल की राग से ,जंगल का रूप और भी मनोहर बनजाती। कई साल बीत गए।

    एक दिन एक खूनख्वार शेर किसी जंगल से भटकते हुए इस सुंदरवन जंगल में पहुंच गया और वह इस जंगल को देखकर वह सोचा की इस जंगल को मैं क्यों न अपने कब्जे में हासिल कर लूं। और इस जंगल का मैं राजा बन जाऊं ।सब पर अपना हक चलाऊं। ऐसा सोचाऔर भयंकर क्रोध से गरजने लगा सभी जानवर इस क्रोध गर्जन से भयभीत होकर डर गए और इधर उधर भाग गए।तब शेर ने एक हिरण की ओर दौड़ा और उस पर हमला किया और उसे मार डाला। इस तरह हर दिन क्रोध गर्जन स्वर करता रहा और शेर की कठोर भयंकर ध्वनि सुनकर  जानवर इधर-उधर भागते रहे। जो शेर के नजदीक जो जानवर मिल जाता उस पर हमला कर उसे मार डालता ।इस तरह हर दिन हमला करते रहता था ।

    एक दिन सभी जानवरों ने सोचा कि हम लोग इसका कुछ एक उपाय सोचते हैं। दूर जंगल मे एक सभा का आयोजन की। शेर को कैसे जंगल से भगाना है।सभी जानवरों सोच विचार करके एक उपाय सोच ली ।और शेर का सामना सब मिलजुल करने की कसम खाईं। दूसरे दिन सभी जंगल के जानवर एवं पक्षियां शेर के इंतजार के लिए राह देख रहे थें।

    अचानक शेर आया और इतने भयंकर गर्जन से सबको डराने लगा ।सभी जानवर जिस प्रकार निर्णय कर लिए थे;उसी प्रकार सभी जंगल के जानवर एकता से सभी मिलजुल कर टस से मस न हुए । शेर और भी भयंकर गर्जन करने लगा। जानवरों को डराने के लिए सोचा। पर भी सभी जानवर मिलजुल कर यथास्थिति में खड़े रहे । शेर का सामना करने के लिए एक एक कदम बढ़ाने लगे शेर यह देखकर बेचैन हो गया। यह जानवर तो मेरी आवाज सुनकर इधर-उधर भाग जाते थे;पर आज क्या यह उल्टा हो रहा है। यह मुझसे सामना के लिए  मिलजुल कर मुझपर आक्रमण करना चाहते हैं;और मुझे मारना चाहते हैं। शेर भी एक कदम पीछे हटा। सभी जंगल के जानवर दो कदम आगे बढ़े ।शेर डर कर चार कदम पीछे हटा ।जानवर और चार कदम आगे बढे।शेर भयभीत होकर आठ कदम पीछे हटा। शेर ने सोचा दाल में कुछ काला है ; सब जंगल के जानवर मुझ पर आक्रमण कर मुझे मारना चाहते हैं ! मैं इस जंगल को छोड़कर किसी दूसरी जंगल में भाग जाता हूं ;मेरी प्राण बच जाएगी ! शेर दूसरी जंगल में भाग गया।सभी जानवर पहले के जैसे खशी-खुशी रहने लगें।


** शिक्षा : इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि पर्यावरण का रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। एकता ही हमारा बल है। हमें आपस में हर मोड़ में मिलजुल कर रहना है। कितनी भी भयंकर परिस्थिति हो हम आपस मे एक दूसरे की सहायता करते हुए आपस मे मिलजुल कर रहें। एकता ही हमारा बल है। 



सावित्री जामि "चेतना"

साहित्यिकार

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कथा सरोवर
Editor
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