स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
कोरोना की प्रकृति
जैसे कि हम सभी जानते हैं कि विश्व के सभी तत्वों के दो पहलू होते
हैं-सकारात्मक और नकारात्मक। आज विश्वव्यापी कोरोना से कौन परिचित नहीं है। वैसे
सकारात्मक और नकारात्मक की जब भी बात होती है सकारात्मक पहलू की बात पहले की जाती
है और नकारात्मक पहलू की बाद में। किंतु कोरोना ने विश्व में बहुत भयंकर विध्वंस
मचा रखा है इसीलिए मैं पहले इसके नकारात्मक पहलू की बात करूँगी।तत्पश्चात हम
सकारात्मक पहलू पर दृष्टिपात करेंगे।
--- नकारात्मक पहलू ---
किसी देश में जन्मा,समूचे विश्व
में पला,
विषाक्त दावानल का,घर-घर हमला।
इस मायावी की है अपार कला,
इससे कौन बच सकता है
भला।
इस कोरोना की प्रकृति विषैली,
इसने जैविक युद्ध की खिड़की खोली।
खेली इसने जीवन की होली,
समझ न पायी जनता भोली।
मानव देह पर किया अधिकार,
कर न सका कोई प्रतिकार।
मच रहा है विश्व में
हाहाकार,
हो रहा है एक दूसरे का
तिरस्कार।
क्या होगा इसका परिष्कार ?
कैसे होगा इसका बहिष्कार ?
अहंकारी मानव को हिलाने आया,
रक्त पिपासुओं को झिंझोड़ने आया,
प्रकृति के भक्षक को तड़पाने आया,
मानव को सीमा याद दिलाने आया।
भूले बिसरों को मिलाने आया,
परिवार को फुरसत के क्षण देने आया,
पक्षियों को स्वतंत्रता दिलाने
आया,
मानव को मानवता सिखाने आया।
ओजोन परत को बचाने आया,
अपराधों को घटाने आया,
सभी को स्वच्छता सिखाने आया।
मानव को सामाजिकता बताने आया।
देखो! देखो!कोरोना आया।
स्वरचित कविता
श्रीमती जी.किरण
पाठशाला सहायक
जी.बी.एच्.एस्. चादरघाट नं-2
आबिड्स, हैदराबाद(तेलंगाना)
दूरभाष - 8374630123
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