स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
ओ मेघ!
अरे ओ मेघ,
तुमने तो चमत्कार कर दिया
जिस समय आपकी राह थी वह राह ही बनकर रह गई
जब भूलने के समय आया तो अपने चमत्कार कर दिया
अरे ओ मेघ
तुमने तो चमत्कार कर दिया
जो जिस आपकी राहों में आंखें लगाते रहे
वे आंखें आंखें बनकर ही रह गये जब वह राह को खो चुके थे
उस समय आया तो अपने चमत्कार कर दिया
अरे ओ मेघ
तुमने तो चमत्कार कर दिया
तपती भूमि ने आपकी राह देखती रही उसकी रहा रहा बन कर ही रही जब यह सब
कुछ भूल गए थे उस समय आया तो आपने चमत्कार कर दिया
अरे ओ मेघ
तुमने तो चमत्कार कर दिया
किसान के खेत को माली के बगीचे को
नदी के प्यास के समय को ही भूल गया
तु आया तो चमत्कार कर दिया
अरे ओ मेघ
तुमने तो चमत्कार कर दिया समय के तकाजे को,
मनुष्य के महत्व को,
जानवरों के जीवन को तुमने तो भूल गया
तू आया तो चमत्कार कर दिया
अरे ओ मेघ
तुमने तो चमत्कार कर दिया आधुनिक परिस्थिति को
पहचानते हुए मानव के रास्ते पर चलने का
तूने तो बड़ा दूस्साहस किया
तुने आया तो चमत्कार कर दिया
चंद्रकांत बलभीम बिरादार
प्राचार्य सर्वोदया पदवी महाविद्यालय
हूमनाबाद जी बीदर
राज्य कर्नाटक
97399 30881
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