स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
सुहावनी रात
सूरज को छुट्टी देकर,
चाँद रात में आता है।
सारी रात घूम- घूम कर
सबको राह दिखाता है।
तारे भी हैं टिम-टिम करते,
आँख मिचौनी खेलते हैं।
लगते जैसे नन्हे दीप,
आसमान में जलते हैं।
बादल भी हैं इनके साथी,
जैसे आते हैं बाराती।
शीतल पवन के साथ घूमते,
कभी तैरते कभी डूबते।
पवन भी लाता सुगंध उष्म की,
खिले हुए हर कली- पुष्प की।
पुष्पों पर हैं गीत भ्रमर के,
गुनगुनाते झूमे भ्रमर हैं।
सभी पक्षी पंख पसारे,
अपने घोंसलों के सहारे।
नभ है काला, काली रात है,
चारों ओर छाई सुहावनी रात है।
रफीखा बेगम 'शायरिन'
हिंदी भाषा शिक्षिका
ZPHS Rampur,
mdl. Khazipet,
Dist. Hanamkonda
चरवाणी : 7093716276
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स्वतंत्र भारत का स्वतंत्र साहित्य
Editor
Prasadarao Jami
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