(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "रंग - अक्षरों के")
हे माँ! जय जय हिंद देखे तिरंगा
जन गण हिंद होते फिरंग...
हम से प्यारा हमारा देश
कम नहीं किस से बडती है
जोश
वन्दे वन्दे वन्देमातरम
वन्देमातरम
क्रांतीकारी कदम बढाएँ...
हर अपनी सत्ता वे दिखाएँ..
अंग्रेजों पर नजर लगाएँ...
खुद अपनी लळ्य को सजाएँ..
भारत छोडो...ओ..भाग निकालो..ओ...
आजादी से हमें लगन है...
हम बन्दूक बन पाएँ..'आजाद हो पाएँ..
शांतीवादी नियम बनाएँ....
सज दज कर संविधान लिखाएँ..
भारत जन को अधिकार दिलाएँ..
निज पथ पर हमे युद्ध सिखाएँ...
किस्मत वालो..ओ..कसम तो खाओ..ओ..
भारत माँ की ऋण निभाएँ..
हर बन्धन की प्रण खाएँ.'.आवाज दे पाएँ।
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© सि.हेच. रामुलु
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