Tuesday, March 3

जय जय हिंद देखे तिरंगा - सि.हेच. रामुलु (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "रंग - अक्षरों के")

 (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "रंग - अक्षरों के")





    जय जय हिंद देखे तिरंगा 
💐.....................................................💐


हे माँ! जय जय हिंद देखे तिरंगा

        जन गण हिंद होते फिरंग...

        हम से प्यारा हमारा देश

        कम नहीं किस से बडती है

        जोश

        वन्दे वन्दे वन्देमातरम

        वन्देमातरम


क्रांतीकारी कदम बढाएँ...

हर अपनी सत्ता वे दिखाएँ..

अंग्रेजों पर नजर लगाएँ...

खुद अपनी लळ्य को सजाएँ..

भारत छोडो...ओ..भाग निकालो..ओ...

आजादी से हमें लगन है...

हम बन्दूक बन पाएँ..'आजाद हो पाएँ..               


शांतीवादी नियम बनाएँ....

सज दज कर संविधान लिखाएँ..

भारत जन को अधिकार दिलाएँ..

निज पथ पर हमे युद्ध सिखाएँ...

किस्मत वालो..ओ..कसम तो खाओ..ओ..

भारत माँ की ऋण निभाएँ..

हर बन्धन की प्रण खाएँ.'.आवाज दे पाएँ।

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💐💐💐💐💐💐

© सि.हेच. रामुलु

सरकारी हिंदी प्राध्यापक और फिल्मी गीतकार 
सरकारी बालिका माध्यमिक पाठशाला 
हनामकोंडा 
तेलंगाना 506001
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Sunday, March 1

इन्द्रधनुष - अभिलाषा सक्सेना (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "रंग - अक्षरों के")

 (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "रंग - अक्षरों के")



    इन्द्रधनुष
💐........................💐


आसमान में छाया देखो

सात रंगों का इन्द्रधनुष

इन सातों रंगों में है

जीवन के उपदेश भरा


लाल रंग कहता है हमसे

जीवन में उत्साह भरो

पीला कहता प्रेरणा के साथ

जागरूक होकर आगे बढ़ो


जमुनी कहता जीवन की सच्चाई

को तुम देखो गहराई से

बैंगनी कहता है हमसे

रहो सदा निस्वार्थ भाव से


नारंगी कहता शांति के पथ पर

चलकर तुम अपनी मंजिल पाओ

सात रंगों के महत्व को तुम

अपने जीवन में लाओ

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💐💐💐💐💐💐

© अभिलाषा सक्सेना

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Saturday, February 7

कवि डाॅ जमालपुरकर गंगाधर 'गंध' की दो कविताएँ (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")

(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")



    वंदेमातरम 
💐........................💐


वंदेमातरम मातरम वंदे,

भारत वंदेमातरम जय वंदे,

जग-जननी सुधरणीम वंदे,

विश्व जननी सुख दायिनी वंदे।।


सामाजिक समरस वाहिनी, 

प्रकृति परितोषिनी भूषणी,

स्वदेशीय सानुराग संधायिनी,

नागरिक कर्तव्य बोध प्रदायिनी,

विश्व बंधुत्व पारिवारिक पोषणी,

वंदे, वंदे, वंदे  भू-मातरम वंदे ।।


कोटि कोटि कंठों से गूंजे वंदेमातरम,

जन गण मन की वाणी है माँ तुझे प्रणाम,

स्वतंत्रता सेनानियों का मंत्र यह वंदेमातरम,

स्वराष्ट्रभक्तों का स्वाभिमानी तंत्र वंदेमातरम,

विकसित भारत का प्रेरणायंत्र यह वंदेमातरम,

वंदे वंदे वंदेमातरम जय भारत वंदेमातरम ।।

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    जय हो भारत माँ की लाडलियों
💐.............................................................💐


जय हो विजय हो भारत माँ की पुत्रियों,

देश को गर्व है तुम पर प्रणाम लाडलियों,


यह देश वह देश है नारियां सब पर भारी है,

वह वीर नारी झांसी वाली व अहिल्याबाई है,

अपरा दुर्गा-रुद्रा-रणचंडी-महाकाली भी है,

खेल क्रिकेट में हरमनप्रीत शेफाली जेमी है।


यह अब अबला नहीं सबला महाबला भी है,

ज्ञान-विज्ञान चंद्रयान के उड़ान में भी यही है,

ऑपरेशन सिंदूर की रणाॅगना भी नारी ही है,

सुशील-संस्कारी-साहसी-संयमित सक्षम है।


खेल खेला पूरे लगन से मन मगन जतन से,

पग पग कई उतार-चढ़ाव पार किया साहस से,

होश ना खोया जोश ना छोड़ा हरदम मैदान से,

हर-मन-प्रीत बनाए रखा जीत देश की दिल से ।


नाज़ है तुमपर सरताज भारत माँ की लाडलियों,

देश का बच्चा बच्चा प्रणाम करता तुम्हें लड़कियों,

दुनिया में भारत का परचम लहराया सुधीर नारियों,

जय हो, विजय हो भारत माँ की प्यारी न्यारी पुत्रियों।


अरे कौन कहता वह उल्लू भारत में नारी का मान नहीं,

बदनाम कर रख दिया इतिहास में नारी का सम्मान नहीं,

धर-गृहस्थी में व्यस्त,सुस्त कर कहा यहां कोई वजूद नहीं,

चार-दिवारी में बंदी नहीं वह तो भारत माँ की बिंदी है।

वह तो आलोकित प्रज्ज्वलित भारत माँ के माथे की बिंदी है।

भारतीय नारी मेरे भारत माँ के माथे की बिंदी है । माथे की बिंदी है ।।

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💐💐💐💐💐💐

©   डाॅ जमालपुरकर गंगाधर "गंध"

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श्री नीलकंठ नगर,.सब्जीमंडी हैदराबाद। 
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कवि अतुल चतुर्वेदी की तीन कविताएँ (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")

 

(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")





    सेवा
💐.................💐


निराकार हे प्रभु तुम्हें, पाषाणों में ढाल दिया,

दे आकार सलीके से, शिल्पी ने ये काम किया,

इसी रूप में सेवा है, सृष्टि की ये मेवा है।

सेवा ही सद्कर्म जगत में, सेवा से सद्भाव,

पार लगेगी इसी कृत्य से जीवन रूपी नाव।

परम भाव और मनोयोग से करते जो जन सेवा,

निर्विकार निर्लिप्त कामना पूरी करते देवा ।

मन में अपने धारण करलो श्रद्धा और विश्वास,

निश्छल तन मन में ही रहता प्रभु प्रभुत्व का वास,

छोड़ न देना ईश्वर भक्ति जीवन की यह सांस।

कृष्ण कहो या राम जपो करो आव्हान शंकर,

सभी दुःखों की एक दवा है प्रभु स्मरण मंतर।

अनायास ही जो गलती हो स्वीकारो सेवी,

पालनकर्ता क्षमा करेंगे नैया जो है खैनी।

दुराचार को दूर भगाओ सम्हलो अब हे नेक,

प्रकृति को परिभाषित कर लो विनती है बस एक।

विचलन अन्दर भरा हुआ है, शुद्ध करो हर काम, 

जितनी इच्छा भरी हुई है पूर्ण करेंगे राम।

अनजाने आगास तुम्हारे हर इच्छा अवशेष,

विघ्न विनाषक दूर करेंगे नाम जपो ज्यों गणेश।

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    आज की युवा सोच
💐........................................💐


एनड्रायड मोबाईल हो, घूमने को बाईक हो ,

घर वाले बस कभी न टोकें ऐसी मेरी लाईफ हो,

लड़कियों से बात की पूरी पूरी छूट हो,

शाम को ठण्डी बीयर के 10-12 फिर घूॅट हों

ब्रॉडेड हो कपड़े, दो चार लफड़े 

जूता मोटा भारी हो, बाइक पे तीन सवारी हो। 

पेंट कमर से नीचे जिसकी हड्डी पर रखवारी हो,

खाने में तन्दूरी हो , रोटी मुर्गा प्यूरी हो, 

मॉ-बाप और भाई बहन से बनी रहे कुछ दूरी हो,

जीवन ऐसे जीते है जैसे कोई मजबूरी हो,

खान पान का होश नहीं , भगत जैसा जोश नहीं ,

पैदल चलना है दुष्वार रहते हरदम बाइक सवार?

सुबह नाश्ता पाश्ता छाती पकड़ के खाँसता,

स्कूल कॉलेज जाने से कभी कभी ही वास्ता

दिनभर टी.वी रात में नैट, फेस बुक पर रहते सैट

ईयर फोन का कान में ढेंठा, ऐसे लगा के रखते हैं। 

जैसे घन में लकड़ी बेंटा। 

हरकतें हो सैफ सी, प्रेमिका हो कैफ सी,

मेकडोनाल्डस  और डोमिनोज़ का पिज्जा बर्गर भोजन हो, 

कोल्ड ड्रिंक के साथ में फिंगर चिप्स का योजन हो 

सिनसियरटी का नाम नही , घर का कोई काम नही । 

गाड़ी भले चलाते है पर स्टेपनी और बोनट दूसरों से खुलवाते हैं। 

बॉडी हो सलमान सी , जिम जाना है शान भी 

छोंतरे हों बड़े डबल जिसमें बॉधे पोनी टेल

कान में कुण्डल गले में माला, टूरिस्टों को करते फेल

ऑर्कुट का नशा चढ़ा , ब्लूटूथ है कान में पड़ा। 

घर में गुमसुम रहते हैं जैसे हो कोई सोच

किसी समय भी किसी गर्ल को कर सकें प्रपोज

-ज्यादातर तो यही बन रही आज की युवा सोच। 

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    अतिथि
💐...................💐


हे पार्थ ले रोगी काया,

बिना बुलाये तू क्यों आया,

श्रेणी बन मेहमान की,

हो कटार बिन म्याँन की,

देशी भेष विदेशी छाया,

यह अपनत्व हमें नहीं भाया ।।

विष पीकर हमने अपनाया ।।

आत्म संतोषी हैं हम जीव,

करते काम सभी निर्भीक 

डर तुम्हारा साल रहा,

दस दिनां से पाल रहा,

तुम्हें नहीं है कोई लाज

बच्चों को देते आवाज,

आप हुये निर्लज्ज महोदय,

कब आयेगा तुम्हें सरोदय,

पाया हमने एक सदस्य

बिगड़ गया सब घर परिदृश्य ।


सुबह नास्ता शाम को चाय,

मिलते ही करते हो बाय,

टूट पडो तुम खाने पर

वापस घर पे आने पर,

तुमको नहीं तुम्हारी चिंता,

कैसे रहने दोगे जिंदा,

दस दिनों से रहा हॅूँ झेल,

घर बन गया है तिहाड़ जेल,

दो कमरों का प्यारा घर,

सांसें भरता है दिन भर,

हर बातों में दखल तुम्हारा,

लगता नहीं है बिल्कुल प्यारा,

मेरी पत्नी मेरा सुख,

तुमको भला जी क्या है दुःख,

तुमसे है बस ये विनती,

कब जाओगे हे ‘‘अतिथि‘‘ ।

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💐💐💐💐💐💐

©  अतुल चतुर्वेदी

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मुख्य अभियंता,
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा
मुख्यालय भोपाल
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Thursday, January 22

अनकहा सन्देश - N. Venkat (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")

 

(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")



    अनकहा सन्देश 
💐..................................💐


घुंघराले बाल, नुकीली नाक

काले रंग की चमक

देखने में नहीं लगता इतना आकर्षक

फिर भी देखते-देखते बना मनमोहक

तुम्हारी ऑंखों में दिखते अनेक रंग

देखते उनको मेरा मन चाहता तेरा संग

तेरे संग की कल्पना में बीतता एक युग

लेकिन नहीं होता पूरा मेरा राग।

सच है मेरे दिल का धड़कन तुम

मेरी ऑंखो का रूप तुम

मेरे श्वासों का नाम तुम

मेरे विचारों का सूझ तुम

अब तो मैं नहीं मैं, बना तुम

ऐसा बढ़ गया मेरा दम

क्या कहूॅं क्या बोलूॅं न तो मैं युवक

न तो तुम युवती।।

अरे यार मैं तो पहचाना,

आप केवल नहीं चाहते आईना।

मगर मैं कैसे प्रकट करता तुम्हारी चाह,

निकलेगी वह तुम्हारे मुंह से मेरी इंतजार यह।।

पूछो अपने दिल से क्यों पड़ गई है उसमें दुविधा,

पूछो बार-बार उससे क्या है उसकी इच्छा,

चाहती क्या वह पथ का साथी या राग का साथी,

चाहती क्या वह तन का साथी या दिल का साथी।।

लगेगा तुमको बहुत समय इसकी सोच में,

कह सकता मैं तुम नहीं ठानोगी इस विषय में,

क्योंकि ना तो तुम युवती ना तो मैं युवक,

ना तुझ में जवानी न मुझ में युवकपन।।


💐💐💐💐💐💐

©  N. Venkat 

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SA Hindi, Narsaroapet
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Friday, January 16

हमर छत्तीसगढ़ - मुकेश कुमार भारद्वाज (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")

(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")



    हमर छत्तीसगढ़ 
💐..................................💐


छत्तीसगढ़ के भाखा बोली गुरतूर सुहाथे 

बोरे बासी संग मिरचा पताल अड़बड़ मिठाथे |


करमा, सुवा, पंथी, ददरिया पाँव ल थिरकाथे

संग म मंदरिया भईया मांदर बजाथे |


इहा के तीजा पोरा दाई - दीदी के मान बढ़हाथे 

गेड़ी चढ़के लइका सियान सल्लग दउड़ाथे |


इहा के भुईया धान के कटोरा कहलाथे

पियर-पियर गोदा फूल घर दुवार महकाथे |


इहा के पहाड़ी मैना चह-चह चहकाथे 

बिधून होके बन भइसा भारी अटियाथे 


इहा के रुख-राई, कोयला, लोहा, देश म नाम कमाथे 

फेर काबर इहा के मनखे गरीबी म जिनगी बिताथे |


छत्तीसगढ़ महतारी तोर कोरा सबो बर मया बरसाथे 

फेर काबर तोर लइका मन ल कोन ह लड़ाथे |


छत्तीसगढ़ के माटी संग म रहे ल सिखाथे 

इही बात ल भारद्वाज ह तुंहर से गोहराथे |


💐💐💐💐💐💐

©  मुकेश कुमार भारद्वाज

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ग्राम -फरी पोस्ट -बीजाभाट 
तहसील -बेमेतरा जिला -बेमेतरा (छ. ग.) पिन-491335
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अब नहीं - अंकुश कुमार अग्रवाल (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "प्रहरी अक्षरों का")

(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "प्रहरी अक्षरों का")      अब नहीं 💐.........................💐 मैंने दिल की किताब में ...