Saturday, February 7

कवि अतुल चतुर्वेदी की तीन कविताएँ (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")

 

(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")





    सेवा
💐.................💐


निराकार हे प्रभु तुम्हें, पाषाणों में ढाल दिया,

दे आकार सलीके से, शिल्पी ने ये काम किया,

इसी रूप में सेवा है, सृष्टि की ये मेवा है।

सेवा ही सद्कर्म जगत में, सेवा से सद्भाव,

पार लगेगी इसी कृत्य से जीवन रूपी नाव।

परम भाव और मनोयोग से करते जो जन सेवा,

निर्विकार निर्लिप्त कामना पूरी करते देवा ।

मन में अपने धारण करलो श्रद्धा और विश्वास,

निश्छल तन मन में ही रहता प्रभु प्रभुत्व का वास,

छोड़ न देना ईश्वर भक्ति जीवन की यह सांस।

कृष्ण कहो या राम जपो करो आव्हान शंकर,

सभी दुःखों की एक दवा है प्रभु स्मरण मंतर।

अनायास ही जो गलती हो स्वीकारो सेवी,

पालनकर्ता क्षमा करेंगे नैया जो है खैनी।

दुराचार को दूर भगाओ सम्हलो अब हे नेक,

प्रकृति को परिभाषित कर लो विनती है बस एक।

विचलन अन्दर भरा हुआ है, शुद्ध करो हर काम, 

जितनी इच्छा भरी हुई है पूर्ण करेंगे राम।

अनजाने आगास तुम्हारे हर इच्छा अवशेष,

विघ्न विनाषक दूर करेंगे नाम जपो ज्यों गणेश।

----------------------------------------------------------



    आज की युवा सोच
💐........................................💐


एनड्रायड मोबाईल हो, घूमने को बाईक हो ,

घर वाले बस कभी न टोकें ऐसी मेरी लाईफ हो,

लड़कियों से बात की पूरी पूरी छूट हो,

शाम को ठण्डी बीयर के 10-12 फिर घूॅट हों

ब्रॉडेड हो कपड़े, दो चार लफड़े 

जूता मोटा भारी हो, बाइक पे तीन सवारी हो। 

पेंट कमर से नीचे जिसकी हड्डी पर रखवारी हो,

खाने में तन्दूरी हो , रोटी मुर्गा प्यूरी हो, 

मॉ-बाप और भाई बहन से बनी रहे कुछ दूरी हो,

जीवन ऐसे जीते है जैसे कोई मजबूरी हो,

खान पान का होश नहीं , भगत जैसा जोश नहीं ,

पैदल चलना है दुष्वार रहते हरदम बाइक सवार?

सुबह नाश्ता पाश्ता छाती पकड़ के खाँसता,

स्कूल कॉलेज जाने से कभी कभी ही वास्ता

दिनभर टी.वी रात में नैट, फेस बुक पर रहते सैट

ईयर फोन का कान में ढेंठा, ऐसे लगा के रखते हैं। 

जैसे घन में लकड़ी बेंटा। 

हरकतें हो सैफ सी, प्रेमिका हो कैफ सी,

मेकडोनाल्डस  और डोमिनोज़ का पिज्जा बर्गर भोजन हो, 

कोल्ड ड्रिंक के साथ में फिंगर चिप्स का योजन हो 

सिनसियरटी का नाम नही , घर का कोई काम नही । 

गाड़ी भले चलाते है पर स्टेपनी और बोनट दूसरों से खुलवाते हैं। 

बॉडी हो सलमान सी , जिम जाना है शान भी 

छोंतरे हों बड़े डबल जिसमें बॉधे पोनी टेल

कान में कुण्डल गले में माला, टूरिस्टों को करते फेल

ऑर्कुट का नशा चढ़ा , ब्लूटूथ है कान में पड़ा। 

घर में गुमसुम रहते हैं जैसे हो कोई सोच

किसी समय भी किसी गर्ल को कर सकें प्रपोज

-ज्यादातर तो यही बन रही आज की युवा सोच। 

----------------------------------------------------------


    अतिथि
💐...................💐


हे पार्थ ले रोगी काया,

बिना बुलाये तू क्यों आया,

श्रेणी बन मेहमान की,

हो कटार बिन म्याँन की,

देशी भेष विदेशी छाया,

यह अपनत्व हमें नहीं भाया ।।

विष पीकर हमने अपनाया ।।

आत्म संतोषी हैं हम जीव,

करते काम सभी निर्भीक 

डर तुम्हारा साल रहा,

दस दिनां से पाल रहा,

तुम्हें नहीं है कोई लाज

बच्चों को देते आवाज,

आप हुये निर्लज्ज महोदय,

कब आयेगा तुम्हें सरोदय,

पाया हमने एक सदस्य

बिगड़ गया सब घर परिदृश्य ।


सुबह नास्ता शाम को चाय,

मिलते ही करते हो बाय,

टूट पडो तुम खाने पर

वापस घर पे आने पर,

तुमको नहीं तुम्हारी चिंता,

कैसे रहने दोगे जिंदा,

दस दिनों से रहा हॅूँ झेल,

घर बन गया है तिहाड़ जेल,

दो कमरों का प्यारा घर,

सांसें भरता है दिन भर,

हर बातों में दखल तुम्हारा,

लगता नहीं है बिल्कुल प्यारा,

मेरी पत्नी मेरा सुख,

तुमको भला जी क्या है दुःख,

तुमसे है बस ये विनती,

कब जाओगे हे ‘‘अतिथि‘‘ ।

---------------------------------------------------------


💐💐💐💐💐💐

©  अतुल चतुर्वेदी

----------------------------------------------------------
मुख्य अभियंता,
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा
मुख्यालय भोपाल
--------------------------------------------------------------



चलिए राष्ट्र को समर्पित करें अपनी कलम

हम सब मनायें आज़ादी का अमृत महोत्सव

 साहित्य से जुड़ने का अवसर, अपनी कविता/कहानी/साहित्यिक लेखों से प्रेरणा दें समाज को,,, 

अपनी रचना के प्रकाशन हेतु हमारी योजना का लाभ उठाएं Publish ur writing with ISBN

हर एक रचनाकार के लिए सूचना...

क्या आप अपनी रचना को विज्ञान की मदद से विश्वभर में उपस्थित पाठक तक पहुंचना चाहते हैं?

क्या आप भी भविष्य में साहित्यकार बनना चाहते हैं?

"गीता प्रकाशन बुक्सवाला" की इस योजना से जुड़कर आप यह संभव कर सकते हैं।

जल्द आ रहा है एक साझा संकलन  
" साहित्याकाश रचनाकारों का ... "

प्रकाशित करेंगे जिसे ISBN भी प्राप्त होगा।

उसी रचना को हम हमारे ब्लॉगपोस्ट पर पोस्ट करेंगे जो विश्व में कोई भी कहीं भी मुफ्त में पढ़ सकेगा।

पुस्तक को amazon.in पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।

है ना कमाल की योजना।

इस योजना से जुड़ने के लिए आपको बस हमें अपनी मौलिक रचना भेजनी है,,,

सदस्यता शुल्क 

₹500 कविता के लिए

₹1500 कहानी के लिए पर आपके लिए मात्र ₹1100

₹3000 साहित्यिक लेखों के लिए आपके लिए मात्र ₹1500

Gpay, ppay, Paytm 
9849250784

पुस्तक प्रकाशन के बाद 2 प्रति आप को घर पर भेजी जाएगी।

अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें
9849250784

प्राप्त रचना का प्रकाशन
पहले आओ
पहला स्थान पाओ 
के तर्ज पर किया जाएगा।
--------------------------------------------------------------------------
-----------------------------------------------------------------------
Call 9849250784 for more details on Book. 

Book Published by
GEETA PRAKASHAN BOOKSWALA
Hyderabad
6281822363
-----------------------------------------------------------------------------------------------------


scan to see on youtube



scan to join on WhatsApp

------------------------------------------------------------------------------


BOOK PUBLISHED BY :

GEETA PRAKASHAN

INDIA

Cell 98492 50784


---------------------------------------------------------------------------------

do you want to publish your writing through our BLOGPAGE ?

Please call us 62818 22363

No comments:

Post a Comment

कवि डाॅ जमालपुरकर गंगाधर 'गंध' की दो कविताएँ (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")

(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "उथल पुथल - अक्षरों की")      वंदेमातरम  💐........................💐 वंदेमातरम मातरम व...