(गीता प्रकाशन Bookswala द्वारा प्रकाशित साझा संकलन से)
मन जब भी करता याद तुम्हें
सुख चैन मुझे मिल जाता है।
तेरे गौरव की गाथा
जग का पत्ता -पत्ता गाता है।
मेरे मन में रहो सदा तुम
ज्ञान जगाते,राह दिखाते
मैं भी कुछ कर जाऊं जग में
गीत तुम्हारा गाते -गाते।।
जब मैंने जाना, सुंदर संसार बना
नित्य मेहनत कर, ऊंचाई को मैंने छुआ
अपनी सोच को आकार दिया
भावों की अभिव्यक्ति से पहचान बना
सृजन करना मेरा एक ध्येय बना
मैं भी कुछ कर जाऊं जग मैं
गीत तुम्हारा गाते -गाते।।
गर्व है अपने कर्मों पर
उम्मीदों के दामन को थामे रखा
कर्म भूमि जहां पर है
लोगों का विश्वास बना
नई सुबह नित नया अध्याय बना
हर पल एक नया एहसास बना
नई आशा एक नया विश्वास बना।
मैं भी कुछ कर जाऊं जग में गीत तुम्हारा गाते-गाते ।।
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© श्रीमती ब्रजेश्वरी रावटे
नारायणपुर, जिला -नारायणपुर
उत्तर बस्तर छत्तीसगढ़
94063 37145
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