(गीता प्रकाशन Bookswala द्वारा प्रकाशित साझा संकलन से)
शिव पूजा है शिव का कंठ हैं नीला,
शिव ही ईश है शिव की अनंत है लीला।
शिव ने बचपन से मेरा साथ दिया है।
हर मुश्किल से शिव ने पार किया है।
शिव मेरे स्वामी जैसे दिया ओ बाती,
साथ दे रहे है दिन और राती।
मां भवानी ने उनका जो ध्यान किया है।
बिन मांगे ही मुझे सब कुछ दिया है।
शिव का नाम लेते जो अविनाशी।
तर जाएंगे सब कुंभ और काशी।
मां पार्वती साथ में है राम के संग सिया है।
अनुपम शिव ने विष का घूंट फिर पिया है।
शिव को पूजता है सारा यह जहां।
ढूंढें हम भी उनको हर पल यहां।
रिश्ता जैसे मां भवानी और शिव ने जिया है।
मेरा ओ पतिदेव का साथ , शिव ने दिया है।
शिव से ये जानना, शिव से है कामना,
उनसे बना रहे रिश्ता यूं ही हाथ थामना।
दामन में खुशियां भर दी , सम्पन्न किया है।
शिव को पूजे मिल, शरण में हमको लिया है।
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© वन्दना जोन "स्तुति"
भटेरी, जयपुर, राजस्थान।
75681 60875
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