(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित "शब्द मेरे, विचार सबके" साझा संकलन से)

छाया से छाया मिले
मिले दीप से प्रकाश।
जीवन एक मृगतृष्णा
बुझे कभी ना प्यास।।
शब्द मेरे ये अपने हैं,
सबके अपने विचार।
जिंदगी संघर्ष की भट्टी है,
खूब तपना है अपना काम।
हार-जीत तो बस एक पहेली है,
मिले दोनों में इनाम।।
शब्द मेरे ये अपने हैं,
सबके अपने विचार।
बादलों से बहती है नदियां,
समंदर से होती है बरसात।
काक-कोयल दोनों एक से,
दोनों का अपना आधार।।
शब्द मेरे ये अपने हैं,
सबके अपने विचार।
दुख मनुष्य को मांजता खूब,
सुख से बिगड़े सौभाग्य।
पुण्य करें तो नित यश मिले,
पाप से मिले नित दुर्भाग्य।।
शब्द मेरे ये अपने हैं,
सबके अपने विचार।
गधा ढोए नित-नित धोबी,
दुष्टों को नित ढोए सरकार।
घाट-घाट में धोबन मरे,
दुष्टता से है जनता खूब लाचार।।
शब्द मेरे ये अपने हैं,
सबके अपने विचार।
छाया से छाया मिले
मिले दीप से प्रकाश।
जीवन एक मृगतृष्णा
बुझे कभी ना प्यास।।
शब्द मेरे ये अपने हैं,
सबके अपने विचार।
💐💐💐💐💐💐
कवि पी यादव 'ओज'
साहित्यकार
चौकीपाड़ा, झारसुगुड़ा।(ओडिशा)
99375 10641
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GEETA PRAKASHAN
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