(''गीता प्रकाशन'' द्वारा प्रकाशित साझा संकलन "चंचलता अक्षरों की" )
जीवन के अनमोल धरोहर पर्यावरण जरूरी बा।
यदि बचाव ना करल जाव त मौत के सब मंजूरी बा।।
पेड़ यदि ना रहि पइहैं त कइसे जीवन बचि पाई।
विपदा अइसन आई कि सब केउ चिल्लाई हे माई।।
पेड़ यदि रहि पइहैं त कीटाणु से हीन ई वायु रही।
जीवन स्वस्थ मिली सबके शत बरिस सबइ के आयु रही।।
मृदा उर्वरा हो जाई समृद्ध सबइ जन होइ जइहैं।
तन मन भी स्वस्थ्य रही सबकर हर जन प्रबुद्ध फिर होइ जइहैं।।
जनसंख्या विस्फोट पे भी थोड़ी लगाम तो कसल जाव।
पर्यावरण बचाव कि खातिर कुछ तो प्रयास मिल करल जाव।।
पेड़ यदि कटि जाईं तो पानी के लाला पड़ि जाई।
हर जन के गले में विपदा के बेड़ी हजार भी पड़ि जाई।।
पर्यावरण क संरक्षण जीवन के सुखमय बा अधार।
नव जीवन के नव गति मिलिहैं हो जइत जे अइसन उपचार ।।
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चन्द्रेश श्रीवास्तव
मीरजापुर (उ०प्र०)
97930 79672
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