(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित "चंचलता अक्षरों की" साझा संकलन से)
अपनी बिटिया रानी को तुम पुस्तक लाकर दे
देना, विद्याज्ञान करा के उसको स्वाभिमान बना देना ।
नाम करेगी रोशन बिटिया बस तुम राह दिखा देना ,
मंदिर मस्जिद मत भेजो तुम, विद्यालय भिजवा देना ।
शीश उठाना सीख जाएगी शोषण से लड़ना सीखेगी,
लक्ष्मी बाई और मीरा सी नाम कमाके तुम को भेजेगी ।
बेटा बेटी दोनों सम है भेद नहीं तुम कर जाना,
विकसित भारत की यात्रा मे अपना हाथ बटा जाना ।
दूर गमन भू भाग विश्व मे वह अपनी धाक जमाएगी,
विश्व गुरु बनावाकर भारत जग मे ध्वज फहराएगी ।
कल का भविष्य बिटिया प्यारी श्रीमित्र सदा आभारी है,
देश काल सारी दुनिया मे शिक्षा सब पर भारी है ।
अपनी बिटिया रानी को तुम पुस्तक लाकर दे देना,
विद्या ज्ञान कराकर उसको स्वाभिमान बना देना।
💐💐💐💐💐💐
© श्रीमित्र त्रिपाठी (स.अ.)
सन्विलियन उच्च प्रा वि तेइया,
वि.ख. पनवाड़ी,
जनपद -महोबा (उत्तर -प्रदेश)
79876 04737
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