गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित *डा मधुलिका सिंह* कृत साझा संकलन "कम्पन शब्दों का"
जग में जीत गई वो सबसे पर अपनों से हारी है।।
नारी शोषण आज देश की बहुत बड़ी बीमारी है।।
चूल्हा चौका घर आंगन को रोज सजाना है तुझको,
बच्चों की किलकारी से- घर को महकाना है तुझको,
इस जन्म में कष्ट सहे हैं अगले की तैयारी है ।।
नारी शोषण आज देश की बहुत बड़ी बीमारी है।।
स्वाभिमान को लगा दांव पर घर बगिया को सींचा है,
पुरुषों ने झूठे पौरुष में- तेरा दामन खींचा है,
तेरे सपने कोई न जाने बहुत बड़ी लाचारी है।।
नारी शोषण आज देश की बहुत बड़ी बीमारी है।।
अभिशापित कठपुतली बनकर मांग रही अधिकारों को,
अधिकारों से वंचित फिर भी पूज रही संस्कारों को,
सब तुझको ही बैरी समझें अपनों की गद्दारी है।।
नारी शोषण आज देश की बहुत बड़ी बीमारी है।।
अथक प्रयास करके शिक्षा का बदलो इन व्यवहारों को,
भर उड़ान ऊंचे अम्बर में नापो चांद- सितारों को ,
शिक्षा ही अनमोल रतन है सब जुल्मों पर भारी है।।
नारी शोषण आज देश की बहुत बड़ी बीमारी है।
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ज्योति दिनकर
ग्वालियर
7987049262
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