(''गीता प्रकाशन'' द्वारा प्रकाशित ''श्रीमती सुमा मंडल'' कृत साझा संकलन "अक्षराभिषेक साहित्य का... )
नारी और पुरूष हैं पूरक,
जीवन में दोनों का भूमिका,
अहं, मान्य, योग्य एवं सोहन,
नारी लाज, समर्पित भाव से महती।।
नारी है लाल, बाल के गुरू-प्रथम,
नैतिकता, आध्यात्म में है सुजान,
सही दिनचर्या, अनुशासन में माही,
हर युग, काल में पूजनीया, अति।।
घर संसार से लेकर नील-गगन,
आज उसका पहुंच है सर्वव्यापी,
शिक्षा, दीक्षा, ज्ञान, विज्ञान, अर्थ,
सामाजिकता हो या परिवहन।।
हर कला, कौशल में सुशोभित,
कर्मठता, जुझारूपन में सुमति,
रामायण, गीता, गाय और गंगा,
सब विधा में रखती, निपुणता।।
माता लक्ष्मी और माँ सरस्वती,
दोनों में रखती संतुलन, सह प्रीति
कर्ममय जीवन का है परिभाषा,
गहरा सागर सा दिल भी, उदार।।
नारी के बुते टिका है संसार,
उसके बिनु असंभव है तरक्की,
स्वार्थ रहित प्यार देती सुत, सुता,
घर-परिवार, संसार का है मुकुता।।
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श्रीमती अरुणा अग्रवाल
लोरमी,छःग
9685870287
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