Tuesday, March 12

वास्तविक मूल्य - श्री महिपाल सिंह विजयरणिया (गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित डॉ आशुतोष कृत साझा संकलन "शब्दाभिषेक शिव का" से)

   (गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित डॉ आशुतोष कृत साझा संकलन  "शब्दाभिषेक शिव का" से)




वास्तविक मूल्य
💐...............................💐


    बहुत समय पहले की बात है। किसी गाँव में एक बूढ़ा व्यक्ति रहता था। उसके दो बेटे थे। बूढ़ा वस्तुओं के उपयोग के मामले में कंजूस था और उन्हें बचा-बचा कर उपयोग किया करता था।

    उसके पास एक पुराना चांदी का पात्र था। वह उसकी सबसे मूल्यवान वस्तु थी। उसने उसे संभालकर संदूक में बंद कर रखता था। उसने सोच रखा था कि सही अवसर आने पर ही उसका उपयोग करेगा।

    एक दिन उसके यहाँ एक संत आये। जब उन्हें भोजन परोसा जाने लगा, तो एक क्षण को बूढ़े व्यक्ति के मन में विचार आया कि क्यों न संत को चांदी के पात्र में भोजन परोसूं? किंतु अगले ही क्षण उसने सोचा कि मेरा चांदी का पात्र बहुत कीमती है। गाँव-गाँव भटकने वाले इस संत के लिए उसे क्या निकालना? जब कोई राजसी व्यक्ति मेरे घर पधारेगा, तब यह पात्र निकालूंगा। यह सोचकर उसने पात्र नहीं निकाला।

    कुछ दिनों बाद उसके घर राजा का मंत्री भोजन करने आया। उस समय भी बूढ़े व्यक्ति ने सोचा कि चांदी का पात्र निकाल लूं। किंतु फिर उसे लगा कि ये तो राजा का मंत्री है। जब राजा स्वयं मेरे घर भोजन करने पधारेंगे, तब अपना कीमती पात्र निकालूंगा।

    कुछ दिनों के बाद स्वयं राजा उसके घर भोजन के लिए पधारे। राजा उसी समय पड़ोसी राज्य से युद्ध हार गए थे और उनके राज्य के कुछ हिस्से पर पड़ोसी राजा ने कब्जा कर लिया था। भोजन परोसते समय बूढ़े व्यक्ति ने सोचा कि अभी-अभी हुई पराजय से राजा का गौरव कम हो गया है। मेरे पात्र में किसी गौरवशाली व्यक्ति को ही भोजन करना चाहिए। इसलिए उसने चांदी का पात्र नहीं निकाला।

    इस तरह उसका पात्र बिना उपयोग के पड़ा रहा। एक दिन बूढ़े व्यक्ति की मृत्यु हो गई।

    उसकी मृत्यु के बाद उसके बेटे ने उसका संदूक खोला। उसमें उसे काला पड़ चुका चांदी का पात्र मिला। उसने वह पात्र अपनी पत्नी को दिखाया और पूछा, “इसका क्या करें?”

    पत्नी ने काले पड़ चुके पात्र को देखा और मुँह बनाते हुए बोली, “अरे इसका क्या करना है। कितना गंदा पात्र है। इसे कुत्ते को भोजन देने के लिए निकाल लो।”

    उस दिन के बाद से घर का पालतू कुत्ता उस चांदी के पात्र में भोजन करने लगा। जिस पात्र को बूढ़े व्यक्ति ने जीवन भर किसी विशेष व्यक्ति के लिए संभालकर रखा, अंततः उसकी ये गत हुई।

शिक्षा

    किसी वस्तु का मूल्य तभी है, जब वह उपयोग में लाई जा सके। बिना उपयोग के बेकार पड़ी कीमती वस्तुओं का भी कोई मूल्य नहीं। इसलिए यदि आपके पास कोई वस्तु है, तो यथा समय उसका उपयोग कर लें..!!

सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।

जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।


💐💐💐💐💐💐

श्री महिपाल सिंह विजयरणिया 

हिन्दुस्तान गौरव अवार्डी

रुद्रोल चरखी दादरी (हरियाणा)

96719 35046

----------------------------------------------------------





चलिए राष्ट्र को समर्पित करें अपनी कलम

हम सब मनायें आज़ादी का अमृत महोत्सव

 साहित्य से जुड़ने का अवसर, अपनी कविता/कहानी/साहित्यिक लेखों से प्रेरणा दें समाज को,,, 

अपनी रचना के प्रकाशन हेतु हमारी योजना का लाभ उठाएं Publish ur writing with ISBN

हर एक रचनाकार के लिए सूचना...

क्या आप अपनी रचना को विज्ञान की मदद से विश्वभर में उपस्थित पाठक तक पहुंचना चाहते हैं?

क्या आप भी भविष्य में साहित्यकार बनना चाहते हैं?

 गीता प्रकाशन की इस योजना से जुड़कर आप यह संभव कर सकते हैं।

जल्द आ रहा है एक साझा संकलन  
" साहित्याकाश रचनाकारों का ... "

प्रकाशित करेंगे जिसे ISBN भी प्राप्त होगा।

उसी रचना को हम हमारे ब्लॉगपोस्ट पर पोस्ट करेंगे जो विश्व में कोई भी कहीं भी मुफ्त में पढ़ सकेगा।

पुस्तक को amazon.in पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।

है ना कमाल की योजना।

इस योजना से जुड़ने के लिए आपको बस हमें अपनी मौलिक रचना भेजनी है,,,

सदस्यता शुल्क 

₹500 कविता के लिए

₹1500 कहानी के लिए पर आपके लिए मात्र ₹1100

₹3000 साहित्यिक लेखों के लिए आपके लिए मात्र ₹1500

Gpay, ppay, Paytm 
9849250784

पुस्तक प्रकाशन के बाद 2 प्रति आप को घर पर भेजी जाएगी।

अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें
9849250784

प्राप्त रचना का प्रकाशन
पहले आओ
पहला स्थान पाओ 
के तर्ज पर किया जाएगा।
--------------------------------------------------------------------------
-----------------------------------------------------------------------
Call 9849250784 for more details on Book. 

Book Published by
GEETA PRAKASHAN
Hyderabad
6281822363
-----------------------------------------------------------------------------------------------------


scan to see on youtube



scan to join on WhatsApp

------------------------------------------------------------------------------


BOOK PUBLISHED BY :

GEETA PRAKASHAN

INDIA

Cell 98492 50784


---------------------------------------------------------------------------------

do you want to publish your writing through our BLOGPAGE ?

Please call us 62818 22363

No comments:

Post a Comment

एहसास की खुशबू - सोहन ‘समीं‘ (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "निवेश अक्षरों का")

    (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "निवेश अक्षरों का")     एहसास की खुशबू  💐.......................................💐...