(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित *डॉ.सुषमा सिंह* कृत साझा संकलन "स्वराभिषेक विचारों का" )
मैंने देखे जमाने के बहुरंगी छत्र
न देखा वालिदैन जैसा कोई अन्यत्र
ममता की छाँव में रखते सदा
इनसे ही मिलता हमें प्रेम सर्वत्र l
उजली छत्र तले, बेरंग धूप-छाँव और
जमाने की बेरुखी बारिश से बचाते
दामन में सहजे सदा रखते हमको
ग्रीष्म- शीत हो या कोई ऋतुचक्र l
छत्र है नाम इनके अहसास का
त्याग , समर्पण और विश्वास का
किया बलिदान अपना जीवन सारा
सिखा हमको जीवन का मूल मंत्र l
बुझा न पाए कोई अनवरत आँधी
इनके जलते हुए, चिरागों की रोशनी
हर मुश्किल के सामने ढाल बनकर
दिखते निहत्थे पर भावों से सशस्त्र l
अम्बर से धरती पर आए उतर
वीराने में भी बिखरा दे जो सदा
ईश ने अपने जाने कितने रूपों को
वालिदैन में समाया किया एकत्र l
गुजारिश है बस तुझसे इतनी - सी
ये छत्र बना रहे , बना सर पर सदा
वरदान मिला वालिदैन रूपी हमको
पाया हमने गागर में सागर समग्र l
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© डॉ. ममता भारती
9997371748
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परिचय
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नाम - डॉ. ममता भारती
जन्म स्थान- आगरा (उ.प्र.)
पिता का नाम- श्री चंद्रप्रकाश
माता का नाम- श्री मती सुशीला देवी
पति का नाम - श्री वीरेन्द्र सिंह
शिक्षा - बी. एड. , एम. ए.
एम.फिल. , पी.एच.डी.
(हिंदी)
प्रकाशन -सुवर्णा, संस्थान संगम
मासिक पत्रिका ,अन्य
पत्र-पत्रिका और अनेक
साझा संकलनों में
निरन्तर रचनाएँ प्रकाशित
मोबाइल न. - 9997371748
ई- मेल - Bharti mamta
5284@gmail.com
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