(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित *शब्दाभिषेक शिव का* साझा संकलन से)
स्नेह भरी इक औरत की,
ममता की मधुर कहानी है।
हुआ घर का हर कोना पुलकित,
बालक की इक किलकारी से।
न ही ये कोई कविता है,
न ही ये कोई कहानी है।
ये प्यार है उस दादी माँ का,
जो पोते के लिए छलकता है।
हुआ जन्म तो इसका माँ के तन से,
पर दादी के दिल का टुकड़ा है।
कभी भूख से जब बालक रोये,
दादी के दिल के टुकड़े होए।
बस देख पुत्र की स्मृति को,
सुख के सागर में डूब गई।
हुआ कष्ट जो कभी, शिशु के तन को,
क्षण भर में आँखे भीग गई।
पोते के प्यार में भूल गई,
अपने पाँवों के छाले को।
अपनी प्यारी मुस्कान से,
हर दिल को ही ये भाता है।
माँ के दिल को ये प्यारा है,
पापा का राज दुलारा है।
पर उनकी बातों को सुनना,
उसको नहीं गँवारा है।
इस दुनिया का था, एक ही शक्स,
जो सबसे उसको प्यारा था।
वो शक्स थी, उसकी “दादी माँ”
जिसकी आँखों का तारा है।
खो गई, वो आँखें इस जग से,
जिन आँखों का वो तारा है।
कोई ठेस लगे न इसके दिल को,
दादी के ये अरमान थे।
एक सर्द हवा के झोंके सी,
इसकी प्यारी मुस्कान है।
ये प्यार दिलों का नाता है,
ये खुद से ही जुड़ जाता है।
कोई मोल नहीं इस ममता का,
जो पोते के लिए छलकता है।
स्नेह भरी इक औरत की,
ममता की मधुर कहानी।
ममता की मधुर कहानी है,
हाँ, ममता की मधुर कहानी।
💐💐💐💐💐💐
डॉ प्रवीण कुमार मिश्र
97909 05794
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