(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संकलन "कलम मेरी पहचान")
सत्य अहिंसा के रखवाले, हम पूत बनें महान।
देश सेवा में दिन ढल जाये, हमें ऐसा दो वरदान।
1
नई उषा के बने सिपाही, मेहनत हो अरमान।
बहा सकें प्रेम की धारा, रहे न कोई अनजान।
दया धर्म की बाहें अपनी, फैले चारों ओर ।
शांति सुमन हम बिखरायें, धरती के चारो ओर ।
तन भी सुन्दर मन भी सुन्दर, सुन्दर हो सारा जहान।
सत्य अहिंसा के रखवाले, हम पूत बनें महान।
2
मीठी वाणी सबसे बोलें, फैलायें ज्ञान का दीप ।
पथ के कांटे फ़ूल बने और जाये अंधेरा मिट ।
सूरज चंदा बनके चमकें, बन जायें सभी के मीत ।
दुश्मन आकर गले लग जाये , गायें ऐसे गीत ।
इस जगत के सारे चमन में, हो सबकी मुस्कान।
सत्य अहिंसा के रखवाले, हम पूत बने महान।
3
माता-पिता की सेवा करें, पायें गुरू का ज्ञान।
सांख्य भाव में दिन ढल जाये, जग का हो कल्याण।
एक रहें और नेक बने, हो सबकी यही आस।
तुमको अर्पित श्रद्धा सुमन, कोई न हो उदास ।
दुख में सुख में सारे जीवन में, हो न कभी अभिमान।
सत्य अहिंसा के रखवाले, हम पूत बने महान।
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© चन्द्रहास सेन
शिक्षक ग्राम व पोस्ट कोसरंगी,
थाना खरोरा, जिला, रायपुर
छत्तीसगढ़
पिन 493225
मो, 9752468692
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