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Wednesday, December 6
ये आँसू - अलिशा (लानत) (गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित "यादगार शब्दों का सफर" साझा संकलन से)
(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित "यादगार शब्दों का सफर" साझा संकलन से)
ये आँसू
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ये आँसू है जो दिल के राज खोल देते हैं।
इस डर से हम नज़रे झुका लेते हैं।
ताड़ न जाए वो हमारी कमजोरी
अपने हर जख्म को पलकों में सजो लेते हैं।
दफन है बहुत से राज़ सीने में
यूँ ही नहीं हम आँसूओं को हंसी में डुबो देते हैं।
कौन कहता है आँसूओं के लफ़्ज नहीं होते
परिचित प्रवीण इन्हें पढ़ ही लेते हैं।
सलामत रहे हमारे ये आँसू निशब्द ये मुझको दिलासा देते हैं।
बन न जाए बतंगड कोई आँसू हम इनको पलकों पे सजा लेते हैं।
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