(DESH BHAKTI)

शत् शत् नमन्
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हम रहे ना रहे पर यादे तो रहेगी,
याद करके लोग तो बुदबुदायेगे।
कुछ कहेगे जरूर चर्चा होती रहेगी,
चर्चाओं के बाजार तो गरम ही रहेगे।।
कमी सह पूर्णता ही चर्चा बनेगी,
याद करके तो लोग गमगीन होगे।
कोई शत् शत् कहेगा कोटिशः कोई,
नमन् अनचाहे भी तो करते रहेगे।।
तुम वाक् पटु भी रहे ,बेवाक् भी,
अपने आशीयाने मे सबको बसाते रहे।
तू अटल भी रहे अटल ध्येय भी,
सबके आखो का तारा बनते रहे।।
तेरा मुरीद बनता रहा विपक्ष भी,
दूर दृष्टि थी और अटल बिचार से।
झुकता वह भी सदा न चाहकर भी,
क्यो तुम तो अटल सितारे ही रहे।।
विपक्ष तो झुका विश्व झुकता रहा
देश का कण कण तेरे व्यवहार से।
तू रहे ना रहे चरचा होता रहेगा सदा,
क्योकि बिहारी बन बिचरते रहे।।
पाक दृष्टि मे तुझे सदा बैठाये के,
देख पडोसन झक मारे चरितार्थ ही।
तू तो अटल सितारे क्षितिज के रहे,
वाणी की मधुरता सदाशयता ही।।
तू गगन के सितारे राष्ट्र प्रहरी भी,
राष्ट्रीयता समक्ष दल किनारे कर ही।
देश हित समक्ष सर्व हित तज ही,
ऐसे अगुआ रहे महामना बन ही।।
यत्किंचित ही मिलते तेरे जैसा,
तू अमर ज्योति के तो पुञ्ज ही।
चले तो गये पर छोडा छाप ऐसा,
चलना सीखा हर कोई नक्शेकदम ही।।
तू न जाति रहे न सम्प्रदाय भी,
तू तो अटल देश के अटल ही रहे।
जीवन पथ पै कभी डगमगाये नही,
रूके ही नही कदम बढाते गये ।।
चरण चूमा तेरे उन अरमानों को
जिसमे अटल रहा ध्येय तेरा ही।
ये कह ही दिया जगत ने तभी तो,
तुम तो अटल रहे और बिहारी भी।।
शत् शत् नमन तेरा वन्दन इहि धरा,
कोटिशः चरचा बनती तेरी वाक् पटुता।
तू संकीर्ण नही ब्राड ब्रेन पोषक अगुआ,
तभी तो अटल रहे अटल क्षितिज का।।
बहती गंगा यमुन धारा तुम तो रहे,
हिन्द हिन्दोस्तां के पुजारी भी रहे।
तभी तो चढ हिन्दी शिखर हिन्दू बने,
वह मजहब नही उस संस्कार के।।
जहाँ सहिष्णुता बसती घिन भाव नही,
सबको लेकर चलने की भाव रहती।
इसलिए तो कहा हिन्दू धर्म नही,
वह तो संस्कारो का अमिट अटल ही।।
जिसने सीखाता मजहबी बैर न कर,
पास आये कोई तो शरण दे ही चल।
घिन मत ही रख प्रेम बढाये ही चल,
इसलिए तो हिन्दू मानवता का ही रूप।।
ऊपर उठ संकीर्णता से अटल ने कहा,
तभी तो हिन्दू जगत कहायेगा ही तू।
इसलिए जगत बासी यह रख धारणा ,
हिन्दू धरम नही संस्कृति कह तू।।
अटल पोषक रहे इसी धारणा के,
इसलिए तो कभी दृष्टि घिन न रहे।
उच्च बिचार के पोषक बन कर वे,
विश्व क्षितिज के वे अटल ही रहे।।
सुप्रभातम्।जय हो।जय हिन्द।
ओमप्रकाश द्विवेदी ओम
94153 63758
पूर्व प्रवक्ता, उदित नारायण इण्टरमीडिएट कालेज पडरौना कुशीनगर।
मान्यता प्राप्त पत्रकार।
प्रान्तीय प्रचार मन्त्री ग्रापये ।
अध्यक्ष, काव्यधारा सामाजिक, साहित्यिक व सास्कृतिक परिषद पडरौना कुशीनगर।
39 वर्ष शिक्षण कार्य पुनः दो वर्ष शिक्षण कार्य।
अद्यतन पत्रकार, सामाजिक सेवक व किसान।
छः रचनाए प्रकाशित
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त्रिपुट, दृष्टि, अंजली,ज्योति पथ,रजनीगंधा, रस कलश।
प्रकाशनाधीन - रश्मि, श्वेता, स्मृति, अनन्या ,कलिमस, मेरी डायरी, भोजपुरिया,बतकही।
जन्म - 15-06- 1952
जन्मस्धान - महुअवा बजराटार देवरिया।
योग्यता -स्नातकोत्तर
लेखन अनुभव- 51 वर्ष
ओमप्रकाश द्विवेदी ओम
पुत्र स्वामीनाथ द्विवेदी
माता श्री कुला देवी
पत्नी- श्रीमति बच्ची देवी
पुत्र - सत्यजीत कुमार द्विवेदी शिक्षक
तीन पुत्रियाँ- श्वेता, रश्मि, ज्योति।
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