(हिंदी हूँ मैं...)
ऐ मेरे वतन के लोगों,
जग छोड़ गई सुर-रानी,
थीं हर दिल की वो धड़कन,
थी वो गौरव हिन्दुस्तानी।
बुझ गया चिराग वतन का,
आखों से टपके पानी।
आवाज रहेगी जिन्दा,
सदा याद रहोगी जुबानी।2
ए मेरे वतन के लोगों,
स्वदेश की थीं वो शानी।
जो गूँज रहा था दुनियां में,
स्वर उनका था नूरानी।
साक्षात मात सरस्वती,
बसती थीं उनकी बानी।
जीवन भर तनहा रह कर,
था हर दिल में तेरा बसेरा।
बचपन से तेरे जीवन में,
रहा उतार - चढ़ाव का फेरा।
उठ गया पिता का साया,
जब उम्र मात्र थी तेरा-।
बचपन से ही सिर पे तेरे,
रहा संघर्षों का फेरा।
एक समय ऐसा भी आया,
विस्तर ही था तेरा बसेरा।
कोई दिया स्वीट प्वाइजन,
संकट था तुमको घेरा।
गयी उबर तू ऐसी घड़ी से,
शुरू हुआ गायिकी फेरा।
छा गई सुरों की रानी,
हर दिल पे हुआ बसेरा।
अंधकार मिटा जीवन से,
छा गया अनंत सबेरा।
छा गयीं जगत में पूरी,
तेरे गायन की इल्मे।
हर दिल में धड़कती रहतीं,
तेरे गीत से सजी वो फिल्में।
एक रत्न देश की तूं थी,
भारत रत्न देश की तूं थी।
थी हर दिल की तूं धड़कन,
थी तूं गौरव हिन्दुस्तानी।
तेरी आवाज रहेगी जिन्दा,
तूं सदा याद रहोगी जुबानी।
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रचयिता - विजय मेहंदी
(कविहृदय शिक्षक)
कन्या कम्पोजिट इंग्लिश मीडियम स्कूल शुदनीपुर,
मड़ियाहूँ,
जौनपुर (उoप्रo)
सम्पर्क सूत्र-9198852298


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