भारतीय साहित्य विविध स्वर
माँ गंगा की यात्रा
मुख गोमुख का अंतस्तल
माँ गंगा का उदगम स्थल
कल-कल छल-छ्ल आगे चल
पहुंचीं काशीहरिद्वार पावन स्थल
गिरि के चट्टानों से लड़-लड़ कर
होता पावन अमृत गंगा का जल
पहुँच औद्योगिक कानपुर नगर
दूषण समेट भी अविरल गंगाजल
पहुँच प्रयागराज के पावन भूतल
मिल यमुना जल से गंगा जल
बनता वृहद कुंभ संगम स्थल
कुंभ-राज ये प्रयाग का कुंभस्थल
बढता जाता कर नादि छल-छल
गंगा यमुना का ये मिश्रित जल
दो रंगों का यह अविरल जल
कितना पावन कितना निर्मल
दो-दो सरिता का ये दोहरा बल
जा पहुँचा विंध्य के विन्ध्याचल
धोता माँ का आँचल अविरल जल
कितना पावन गंगा-यमुना जल
आगे जिला बनारस काशी अँचल
विश्वविख्यात पावन तीर्थ स्थल
पग-पग शोभित घाटों से गंगाजल
दशाश्वमेध घाट है गंगा-पूजन स्थल
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रचयिता - विजय मेहंदी
(कविहृदय शिक्षक)
कन्या कम्पोजिट इंग्लिश मीडियम स्कूल शुदनीपुर,
मड़ियाहूँ,
जौनपुर (उoप्रo)
सम्पर्क सूत्र-9198852298
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