काव्य धारा

राष्ट्र चेतना के स्वर
राष्ट्र चेतना के स्वर
-डॉ॰ ओकेन्द्र
हम हैं हिन्द के वीर सपूत, यह भूमि है वीरों की।
हम हैं हिन्द के वीर सपूत जहाँ उत्पन्न होते वीर सपूत।
हम हैं हिन्द के वीर सपूत, यह भूमि है! वीरों की।
वीर सावरकर, सुभाषचन्द्र, लक्ष्मीबाई; भगत, राजगुरू और सुखदेव अनादि।
यहाँ वीरों ने है बलिदान दिया, स्वर्णिम प्राणों को अपने राष्ट्र-यज्ञ में आहूत किया।
यह देश है वीर सपूतों का, यह भूमि है वीरों की।
जहाँ गाँधी और अम्बेडकर ने, इस देश को अविभूत किया।
जहाँ बल्लभ ने इस देश में राष्ट्रीय-एकता का सूत्र दिया।
यह भूमि है! वीरों की, यह देश है वीर सपूतों का।
यहाँ वीरों की गुमनाम फौज ने, विवश किया फिरंगी को।
यहाँ दलित, पिछड़े, आदिवासी वीरों ने, बलिदान दिया है! रण में।
यह देश है वीर सपूतों का, यह मातृभूमि है! वीरों की।
हम प्रणाम करें उन वीरों को मन से, जिन्होंने हमें स्वतन्त्रता की साँसें दी।
हम धन्यवाद करें उन वीरों का, जिन्होंने हमें अभिव्यक्ति की आजादी दी।
यह देश है वीर सपूतों का, यह भूमि है वीरों की।......
आज आधुनिकता के पल में हम, भूल गए उन वीरों को।
जरा याद करो कुर्बानी उनकी, उन जाने-अनजाने वीरों की।
आज आवश्यक है एक क्रान्ति की, जो याद दिलाएँ उन वीरों की।
जरा याद करो कुर्बानी उनकी, उन जाने-अनजाने वीरों की।
दयानन्द सरस्वती, विवेकानन्द के सिद्धान्त सही आवश्यक है,
ज्योतिबा फुले, सावित्री के पद चिन्हों पर चलने की आवश्यकता है,..... जिन्होंने समाज का उद्धार किया।.....
यह देश है वीर सपूतों का, यह भूमि है वीरों की।.....
हम हैं वीर सपूत उस देश के, जहाँ विश्व बन्धुत्व का मान रहे।
यह देश है वीर सपूतों का, यह भूमि है वीरों की।
हम हैं वीर सपूत उस देश के,..... जहाँ सर्व-धर्म हिताए सर्व-धर्म सुखाय परिकल्पित हो।
यह देश है वीर सपूतों का, यह भूमि है वीरों की।
यहाँ विश्वबन्धुत्व का मान रहे,..... वसुधैवकुटुम्बकम् परिकल्पित हो।
यह देश है वीर सपूतों का, यह भूमि है वीरों की।
हमें मान है अपने देश पर,..... जहाँ सामाजिकता को बौध धरे;
हिन्दु, मुस्लिम सिक्ख, ईसाई सब आपस में हैं भाई-भाई,.....
यह देश है संदेश देता,..... आपसी सौहार्द, भाई-चारे का।
हमें गर्व है अपनी माटी पर, जहाँ जन्म लिया है हमने।.....
यह देश है वीर सपूतों का, यह भूमि है वीरों की।.....
आओ हम सब मिलकर..... उन वीरों के पुनीत चरणों में,.....
श्रद्धा-सुमन अर्पित करें, हम बारम्बार-बारम्बार।
यह देश है वीर सपूतों का, यह भूमि है वीरों की।.....
जय हिन्द.....
प्रखर शिक्षाविद् एवं समीक्षक
ऊखीमठ, जनपद-रूद्रप्रयाग (उत्तराखण्ड)
dr.okendrahindibooks@gmail.com
7060641245
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