भारतीय साहित्य विविध स्वर
माँ का प्यार
एक सुंदर गाँव में सुंदर परिवार था।परिवार में माता-पिता,भाई-बहन और एक छोटी लडकी रहते थे।लडकी का नाम अरु था।अरु दस साल की थी।
एक दिन अरु की माँ ने बाजार से अंडे लाने को कहा।अरु खुशी -खुशी थैली लेकर बाजार को निकल पडी।दुकान पहुँचकर देखा तो भीड बहुत थी।उसने थोडी देर इंतजार की।
तब दुकानदार ने पूछा "क्या चाहिए?"
अरु बोली "अंडे"
दुकानदार ने पूछा "कितने?"
अरु बोली "बारह"
दुकानदार ने बारहअंडे कागज में लिपटकर अरु की थैली में रख दिया।अरु बहुत सावधानी के साथ थैली पकडकर दुकान की सीढियाँ उतर रही थी।अचानक थैली सीढियों से लग गई।
बस,अब क्या होना था? सारे अंडे फट गए।
अरु भयभीत हो गई।उसकी हालत बहुत खराब थी।वह इतनी डर गई कि समझ नही रही थी कि अब क्या करें? बहुत देर तक दुकान की दीवार के पास खडी रही।आते-जाते लोग अरु को देखते,मगर कोई नही पूछ रहा था कि क्या हुआ है?उसकी तकलीफ समझनेवाला कोई नही था।
अरु बिल्कुल मासूम थी।वह सोचने लगी कि अगर इस हालत में घर जायेगी तो माँ उसे जरूर पीटेगी।यह सोचकर वह और डर गई और वही दीवार के पास खडी रही।मगर देखते-देखते अंधेरा हो गया।अब उसे अंधेरे से डर लगने लगा।वह घर की तरफ निकल पडी।
घर पहुँचने के बाद अरु दरवाजे के पीछे छिप गई।अरु की माँ ने उसे घर में आते देखा था।लेकिन वह फिर गायब हो गई।माँ सारा घर ढूँढने लगी।पूरा घर छान मारा।आखिर अरु दरवाजे के पीछे मिल ही गई।जब उसने माँ को देखा तो डरकर कांपने लगी। माँ की मार खाने से डरने लगी।
पर आश्चर्य!अरु की माँ तो उसे मारने की बजाय गोद में उठायी।फिर बडे प्यार से बोलने लगी "अरु,मुझे सब पता है।तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है।एक बात समझ लो,अगर कभी अनजाने में कोई भूल हो जाती है तो तुरंत माँ से बोलना चाहिए।डरना नही।माँ सबकुछ समझ सकती है।"
माँ की प्यार भरी बातें सुनकर अरु बहुत खुश हुई।प्यार से माँ को लिपट गई।
सीख :
माँ हर हालत में बच्चों से प्यार करती है।वह बच्चों के हर तकलीफ को समझ सकती है।इसलिए हमेशा माँ से प्यार करते रहो।


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