Wednesday, June 1

सोया जी भर - मधु बावलकर (काव्य धारा)

काव्य धारा


सोया जी भर

जो इंसान जिंदगी में सिर्फ सोया जी भर
पाया तो कुछ ही नहीं, मगर खोया जी भर।।
मरने के बाद जमीन फलक भी रोते हैं
सच्चाई के बीज दुनिया में बोया जी भर।।
सच्चा है वह सच्ची मोहब्बत भी है उसकी
किसी की यादों में शख्स जो रोया जी भर।।
हक्क की रहमत तरस खायेंगी उसी पे
बहरे गम में जो खुद को डुबोया जी भर।।
मंजिलें इश्क पर ही ठहरेगे कदम उनके
कांटों को जो पैरों में पिरोया जी भर।।
फसल उगती है मोहब्बत की खुद ही दिल में
देखो कांटा भी है उसने बोया जी भर।।
मैंने तेरी याद में जिंदगी गुजारी है
मैं आज तक तेरे गम में ना सोया जी भर।।


मधु बावलकर
आदिलाबाद, तेलंगाना
9959161360


-------------------------------------------------------------------------------------
Call us on 9849250784
To join us,,,

No comments:

Post a Comment

विघ्नेश्वर - पोतराज श्रीनिवास राव (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "प्रहरी अक्षरों का")

  (Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "प्रहरी अक्षरों का")     विघ्नेश्वर 💐...................💐 संकट हरण है विघ्नेश्वर दू...