(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "स्नेह - अपनी लेखनी से")
बड़ों की बातें ध्यान से सुनो,
धर्मग्रंथों को पहचानो,
अच्छे मार्ग पर सदा चलो,
जीवन सुखमय बनाओ।
भँवरे जैसे बनो,
फूलों का रस पी लो,
फूलों की सुंदरता सँजोकर,
प्रेम से जीवन जी लो।
सुख-शांति से रहो सदा,
चैन की नींद सोओ,
सबसे मिलकर प्रेम से रहो,
अच्छी आदतें बोओ।
माता-पिता की बात मानो,
बड़ों का आदर करो,
सबका भला करते हुए,
हर दिल में प्रेम भरो।
गणपति ने माता-पिता की परिक्रमा कर
अग्रगण्य स्थान पाया,
राम ने पिता की आज्ञा मानकर
आदर्श पुत्र कहलाया।
ध्रुव ने अटल भक्ति से
ध्रुवतारा पद पाया।
जीवन बहुत अनमोल है,
इसे व्यर्थ मत गँवाओ,
हर पल अच्छे कर्मों में लगाओ,
अपने जीवन को सँवारो।
सुनते हो तो सुनो,
नहीं तो अपना मार्ग चुनो।
पर याद रखो, जैसी आदत होगी,
वैसा ही सुख तुम पाओ।
गटर में सोने वाले को
गटर ही सुख देता है,
राख में सोने वाले को
राख ही भाती है।
नाली के कीड़े को नाली भाए,
गोबर के कीड़े को गोबर,
कीचड़ में भैंस को सुख मिले,
उसे वहीं लगता सुंदर।
कुत्ते के आगे खीर रखो,
वह भी “कीड़े-कीड़े” कहता है,
जिसे जैसी आदत पड़ जाती है,
वही उसे अच्छा लगता है।
इसलिए अच्छे विचार चुनो,
अच्छी संगति अपनाओ,
माता-पिता का मान रखो,
प्रेम-शांति से जीवन बिताओ।
सुनते हो तो सुनो,
सुनते हो तो सुनो—
जीवन को सुंदर बनाना है तो
अच्छे मार्ग पर चलो!
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© अनसूया आर
अनसूया आकाश चव्हाण
JL in हिंदी,
Jaya shankar - bhupalapally
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