(गीता प्रकाशन Bookswala द्वारा प्रकाशित साझा संकलन से)
आहिस्ता चल जिंदगी अभी
कई कर्ज चुकाना बाकी है
कुछ दर्द मिटाना बाकी है
कुछ फर्ज निभाना बाकी है
रफ्तार में तेरे चलने से
कुछ रूठ गए कुछ छूट गए
रूठों को मनाना बाकी है
रोतों को हॅंसाना बाकी है
कुछ रिश्ते बनकर टूट गए
कुछ जुड़ते जुड़ते छूट गए
उन टूटे छूटे रिश्तो के
जख्मों को मिटाना बाकी है
कुछ हसरतें अभी अधूरी है
कुछ काम भी और जरूरी है
जीवन की हर उलझन एक पहेली है
उसे सुलझाना बाकी है
जब सांसों को थम जाना है
फिर क्या खोना क्या पाना बाकी है
पर मन के जिद्दी बच्चे को यह बात बताना बाकी है
आहिस्ता चल जिंदगी अभी
कई कर्ज चुकाना बाकी हैं
कुछ दर्द मिटाना बाकी हैं
कुछ फर्ज निभाना बाकी हैं
आहिस्ता चल जिंदगी अभी फर्ज निभाना बाकी है
कर्ज़ चुकाना बाकी है
💐💐💐💐💐💐
© शशि शर्मा
8700781824
----------------------------------------------------------
------------------------------------------------------------------------------
GEETA PRAKASHAN
Please call us 62818 22363

.jpeg)
No comments:
Post a Comment