(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित *के पद्मजा* कृत साझा संकलन "चंचलता अक्षरों की")
हम सोचते है
बीती हुई बातों से बिगड़ी है जीवन
सच यह है
बिगड़ी बीती बातों से नहीं
बल्कि हमारी सोच से।।
हम सोचते है
कल हमारे लिए कैसी होगी?
कल हमारी भविष्य है
जरूर अच्छी होगी।
सोच बदलिए
जिंदगी का हर पल
जीने की कोशिश कीजिए ।।
हम कभी नहीं सोचते है
वर्तमान ही हमारे लिए मधुर क्षण है
मधुरता को आस्वादन करने के लिए
खुद बढ़िया जीवन जिए
औरों को जीने दे।।
आस पास की सुंदरता
सिर्फ हमारी मुस्कान से भरे
सभी लोगों के चेहरों पर
मुस्कान भरने की कोशिश करे
क्योंकि मुस्कान से समाज में
जीने की उमंग भर सकते है
जीवन क्षण भंगुर है।।
यह जानिए
जीवन न सिर्फ आपकी हैं
मेरी, तुम्हारी, हमारी…
जीत जो आज आपकी है
कल मेरी होगी।।
यह सिर्फ संपत्ति की बात नहीं
खुशियों की, शांति की, उमंग की, उल्लास की।
ज़िंदगी को हर्ष से भरने की
जंग ही जीवन है
गिरनेवाली हर पग
उठकर आगे बढ़ने के लिए संदेश लेकर
सच्ची सोच से आगे बढ़िए।।
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© साई श्री
चेन्नई
8754443800
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