(गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित "चंचलता अक्षरों की" साझा संकलन से)
जन्म लेने से पहले गर्भ मे ठीक तरह से पल तो लूँ
स्कूल जाने से पहले घर मे अच्छी तरह खेल तो लूँ
रोने से पहले जी भर कर हँस तो लूँ
दूसरो को सिखाने से पहले स्वयं कुछ सीख तो लूँ
ससुराल जाने से पहले मायके मे जी तो लूँ
सुख पाने से पहले दुःख का अनुभव कर तो लूँ
माँ बनने से पहले बेटी बनकर जी तो लूँ
दूसरो को खिलाने से पहले मै पेट भर खा तो लूँ
लुटने से पहले दूसरो को पूरी तरह लूँट तो लूँ
सास बनने से पहले बहु का कर्तव्य निभा तो लूँ
उजाले मे जीने से पहले अँधेरे की गंभीरता देख तो लूँ
खर्च करने से पहले कमाने का रास्ता जान तो लूँ
अमीर बनने से पहले गरीब पर नजर डाल तो लूँ
महल का मजा लेने से पहले झोपडी मे रहकर देख तो लूँ
देश को आगे बढ़ाने के लिए सही व्यक्ति को मतदान कर तो लूँ
मरने से पहले जिन्दगी सारी अच्छी तरह जी तो लूँ
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© के कृष्णा कुमारी
97042 09042
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