गीता प्रकाशन द्वारा प्रकाशित *अरविंद सिंह चौहान'* कृत साझा संकलन "कम्पन शब्दों का"
क्या लिखूँ तुम्हारे बारे में,
मेरी रगों में खून,
दिल में धड़कन ,
और वजूद की पहचान
तुम ही हो अब्बू।
सर्दी में कंबल से मुझे ढांकना,
मेरे लिये सही गलत को आंकना,
मेरे बेहतर कल की फिक्र
कौन करता था,
वो तुम्ही हो अब्बू।
पैरों पर हम खड़े हो जायें,
तो कर्जों की दलदल में भी,
जो मुस्कराता था
वो चेहरा,
तुम ही हो अब्बू।
विदाई पर मेरी,
जो शख्स कोने में छिपकर,
बहुत रो रहा था
वो तुम्हीं हो अब्बू।
आज मेरे घर पर छत,
चेहरे पर चमक,
कपडों में इतर की महक,
मेरी रसोई में नमक,
वजह.....
तुम ही हो अब्बू
"रहनुमा " की हिम्मत
नाम, शान, और पहचान
तुम्हीं हो अब्बू।
💐💐💐💐💐💐
रहनुमा बानो
(प्र.अ.इं)
ब्लॉक- मडावरा
जनपद- ललितपुर
उत्तर प्रदेश
8127909786
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