(हिंदी हूँ मैं...)

कविता ओ कविता
वैश्विक तेरा क्षेत्र।
सबके जैसा तेरे लिए भी
एक दिवस मना रहे हैं
लेखक गण।
मैं किसके बारे में लिखूं?
कालानुसार बदलते समाज के
बारे में लिखूं!
पाश्चात्य सभ्यता के अंधेधुंध से
बिगड़ते संस्कृति के बारे में लिखूं!
दिन ब दिन गिरते नैतिक मूल्यों के
ह्रास के बारे में लिखूं!
समाज को महामारी जैसे
पीड़ित करते आधुनिक
गाड्जेटों के बारे में लिखूं!
कविता ओ कविता
वैश्विक तेरा क्षेत्र।
भुखमरी से आर्तनाद करते
गरीबों के बारे में लिखूं!
तुझे आलंबन बना कर
साहिती अंबर को चूमते
रचनाकारों के बारे में लिखूं!
दुनिया में फैले अशांति को
दूर कर विश्व शांति पल्लवित
होने की अपेक्षा करते हुए लिखूं!
कविता ओ कविता
वैश्विक तेरा क्षेत्र
और क्या लिखूं
मैं कवि के नाते!
समीउल्लाह खान
पी.जी.टी(हिंदी)
गुरुकुल पाठशाला नेलकोंडपल्ली, खम्मं जिला।
70132 43207

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