कथा सरोवर
- वै.शारदा "शारु"
एक छोटा सा गाँव था। गाँव के कई परिवारों में महेश का भी एक परिवार था। परिवार में महेश सबसे छोटा था। महेश के दो भाई-बहन थे। महेश दूसरी कक्षा में पढ रहा था।
एक दिन घर में प्रातःकाल का समय महेश जब नींद से उठा तो देखा कि अपने भाई और बहन के दोस्त आये हुए हैं।कुछ लडकियाँ फूल तोडकर माला बना रही थी और कुछ मुह धोकर तैयार हो रहे थे। घर का वातावरण कुछ अलग ही था। महेश की बहन ने सब के लिए चाय बनायी। सब लोग बडे प्रसन्न थे।
महेश सब देखता रहा। वह नही समझ पाया कि वे सब इतने सवेरे उसके घर में क्यों हैं? और क्यों तैयार हो रहे हैं?
साढे पाँच बजे सब लोग मिलकर एक साथ निकल पडे। बहन ने महेश को भी तैयार किया था। वह भी उनके साथ चल पडा। सब मिलकर पाठशाला पहुँचे। सभी लाइन में खडे हो गए।
फूल की मालाएँ गाँधी जी के फोटो पर पहनाए। बाद में बच्चें दो-दो के झुण्ड बनकर प्रभातफेरी के लिए निकले। सबसे आगे बैंड बजानेवाले बच्चें थे। प्रधानाध्यापक जी अध्यापकगण और अध्यापिकाएँ बच्चों के साथ चल रहे थे। बच्चें जोर से नारें लगा रहे थे,"बोलो भारतमाता की जय"', "बोलो महात्माग्ँधी जी की जय"।बच्चों के आवाज सुनकर गाँववाले जाग गए। वे अपने काम- काज छोडकर बाहर आये और बच्चों को देखने लगे। खुशी और उत्साह का वातावरण गाँव को घेर रखा था।
महेश ये सब देखते हुए अपने बहन के साथ चल तो रहा था पर समझ नही रहा था कि ये सब क्यों कर रहे हैं?
प्रभातफेरी के बाद सब पाठशाला को पहुँच गये।
प्रधानाध्यापक जी गाँधी जी के फोटो की पूजा की और तिरंगा झण्डे को फहरायें। सबलोग झण्डावन्दन करके राष्ट्रगीत गाये। अंत में सबको मिठाइयाँ बाँटेगये। बच्चें खुशी- खुशी घर लौटे।
महेश घर पहुँचकर देखा कि उसका भाई झण्डा तैयार कर रहा है। घर मेँ एक बार फिर झण्डा फहराया गया।
जब महेश बडा हो गया तब उसे पता चला कि क्यों झण्डा फहराया जाता है।
# सीख #
खुशी का वातावरण सबको खुश बना देता है।
वै.शारदा "शारु"
हिन्दी अध्यापिका
जिला— रंगारेड्डी
मोबाइल नं—9491484099

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