(Geeta Prakashan Bookswala's Anthology "धमाका अक्षरों का")
अंधेरों को चीरकर आज, दीपों का कारवां आया है,
हर घर-आँगन में देखो, कैसा उजियारा छाया है।
माँ लक्ष्मी का पूजन करके, सबने माथा टेका है,
खुशियों से सज़ा हर कोना, ऐसा मंजर देखा है।
खिलखिलाती हँसी की लहर है, बच्चों का उत्साह नया,
मिठाइयों की मिठास में, हर दिल का मैल गया।
चटख रंगों की रंगोली से, सजाए द्वार-दरवाजे हैं,
जगमगाती इस रात में, जगमग सारे नताजे हैं।
पटाखों की गूँज से गूँजा, देखो सारा आसमान,
सज-धज कर बैठी है धरती, जैसे कोई दुल्हन महान।
चलो जलाएँ मन के भीतर, ज्ञान का एक ऐसा दीप,
जहाँ मिट जाए बैर-भाव, और गले लग जाए हर मीत।
शुभ दीपावली का संदेश, घर-घर तक पहुँचाना है,
हर दिल में प्यार का दीपक, सदा जलाए जाना है।
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© डॉ. संतोष रंगराव
वरिष्ठ विपणन अधिकारी
क्षेत्रीय कार्यालय, विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय, हैदराबाद
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GEETA PRAKASHAN
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